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October 16, 2026 4:13 am

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नवरात्रि में भाईचारे का संदेश, नाथल दाई धाम में बिना साउंड के माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना

अम्बिकापुर/ नवरात्रि के पावन अवसर पर ग्राम बेनीपुर रनपुर खुर्द स्थित नाथल दाई मंदिर परिसर में स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा की विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। पत्रकारों ने भी माता के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।

नाथल दाई समिति, बेनीपुर के पदाधिकारी अनुज दुबे ने बताया कि नवरात्रि के अवसर पर माता नाथल दाई धाम के समीप पंडाल में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है, जहाँ नौ दिनों तक श्रद्धालुओं द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। सामाजिक सद्भाव और सभी की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए यहाँ लाउडस्पीकर एवं साउंड बॉक्स के माध्यम से भजन-कीर्तन और आरती नहीं करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि विगत 10 अक्टूबर को तकिया मजार की अंजुमन कमेटी द्वारा आयोजित बैठक में नवरात्रि के नौ दिनों तक बिना साउंड के पूजा-पाठ करने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में शामिल माता नाथल दाई समिति के सदस्यों एवं अन्य लोगों ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की भावना से इस प्रस्ताव पर सहमति जताई। इसी सहमति के अनुरूप वर्तमान में बिना साउंड सिस्टम के माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि साउंड सिस्टम में आरती या कोई म्यूजिकल प्रोग्राम नहीं करने के प्रस्ताव को लेकर लोगों में नाराज़गी है।

अनुज दुबे ने कहा कि माता नाथल दाई धाम के समीप ही तकिया मजार स्थित है, जहाँ प्रतिवर्ष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन आयोजनों में बड़े साउंड सिस्टम के साथ गीत-संगीत एवं कव्वाली के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर विभिन्न संप्रदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते आए हैं।

माता नाथल दाई की प्राचीन लोकमान्यता

रनपुर खुर्द निवासी अर्जुन राम पटेल ने बताया कि पंडाल में स्थापित माँ दुर्गा के स्वरूप में माता नाथल दाई की आराधना की जा रही है। इस स्थल पर प्राचीन समय से बैगा, देवार, गुनिया एवं ग्रामवासियों द्वारा पूजा-पाठ किया जाता रहा है। ग्रामीणों की गहरी आस्था है कि माता इस स्थल पर विराजमान हैं और श्रद्धालु नियमित रूप से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

श्रद्धालु जनमेजय मिश्रा ने नवरात्रि एवं माता नाथल दाई धाम की धार्मिक मान्यताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्राम बेनीपुर में माता नाथल देवी के प्राचीन मंदिर के अवशेष आज भी मौजूद हैं। स्थल पर बाउंड्रीवाल का निर्माण भी किया गया है। प्राचीन परंपरा के अनुसार यहाँ बैगा, गुनिया, देवार एवं ग्रामीणों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती रही है। लोकमान्यता के अनुसार, गांवों में होने वाले पारंपरिक पूजा-पाठ में माता कामाख्या के लघु स्वरूप के रूप में पूजित माता नाथल देवी की भी आराधना की जाती है।

उन्होंने कहा कि सरगुजा की लोक संस्कृति में देवी-देवताओं से जुड़े अनेक ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास केवल पत्थरों और शिलालेखों में ही नहीं, बल्कि लोकगीतों, बुजुर्गों की स्मृतियों, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपराओं और जनआस्था में भी सुरक्षित है। माता नाथल दाई ऐसा ही एक महत्वपूर्ण लोक आस्था का केंद्र हैं। ग्रामीणों एवं बुजुर्गों की मान्यता के अनुसार, यह स्थल लगभग 500 वर्ष से अधिक पुराना है। माता नाथल दाई को चंद्रहासिनी देवी की बहन तथा माँ कामाख्या की छोटी बहन के रूप में भी पूजित माना जाता है। सरगुजा सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बैगा, गुनिया और देवार समुदाय द्वारा पारंपरिक पूजा-पाठ एवं झाड़-फूंक के दौरान माँ महामाया और चंद्रहासिनी देवी के साथ माता नाथल दाई का भी आह्वान किया जाता है।

नवरात्रि के इस पावन अवसर पर माता की आराधना के साथ सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है।

ATD News
Author: ATD News

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