अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ में विकसित भारत–जी राम जी योजना (पूर्व में मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत तकनीकी सहायकों ने अपनी लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान को लेकर मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी। छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर अंबिकापुर सहित प्रदेश के सभी 33 जिलों में कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों ने नियमित पदों का सृजन कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में समायोजन, सेवा सुरक्षा, पदनाम परिवर्तन और समय पर वेतन भुगतान की मांग उठाई है।
संघ के अनुसार, प्रदेश में योजना के अंतर्गत करीब 1,242 तकनीकी सहायक कार्यरत हैं, जिनमें अनेक कर्मचारी पिछले 8 से 20 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। लंबे समय तक विभागीय कार्यों और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में योगदान देने के बावजूद नियमितीकरण और स्थायी सेवा की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
20 साल तक सेवा, फिर भी स्थायीकरण का इंतजार
तकनीकी सहायकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें नौकरी की अनिश्चितता, अल्प वेतन, कई महीनों तक भुगतान लंबित रहने और निर्धारित कार्यों से अतिरिक्त जिम्मेदारियां दिए जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
संघ का आरोप है कि योजना को मांग आधारित स्वरूप के बजाय लक्ष्य आधारित तरीके से संचालित करने के कारण तकनीकी सहायकों पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास निर्माण पूरा कराने का अतिरिक्त दबाव, तकनीकी कार्यों के बावजूद काम नहीं करने के आरोप और वेतन रोकने अथवा कार्रवाई की चेतावनी जैसी शिकायतें भी कर्मचारियों ने उठाई हैं।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
हड़ताल के दौरान तकनीकी सहायकों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
पहली मांग : विकसित भारत–जी राम जी योजना में कार्यरत सभी तकनीकी सहायकों के लिए नियमित पद सृजित कर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में समायोजन किया जाए।
दूसरी मांग : नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक ग्राम पंचायत सचिवों की भांति सेवा सुरक्षा एवं स्थायीकरण संबंधी नियमावली तत्काल लागू की जाए।
तीसरी मांग : तकनीकी सहायकों का पदनाम बदलकर कनिष्ठ अभियंता (VB-G RAM G) किया जाए।
चार समस्याओं के समाधान की भी मांग
संघ ने कर्मचारियों की चार प्रमुख समस्याओं के समाधान की मांग की है। इनमें मांग आधारित योजना को लक्ष्य आधारित बनाकर कर्मचारियों पर अनुचित दबाव डालने का विरोध, प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की अतिरिक्त जवाबदेही से राहत, तकनीकी कार्यों के बावजूद काम नहीं करने का आरोप लगाकर कार्रवाई की धमकी देने की शिकायत तथा समय पर वेतन भुगतान और वार्षिक वेतन वृद्धि शामिल हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि कई बार दो से चार महीने तक वेतन नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो जाता है। फील्ड में कार्य करने के बावजूद नियमानुसार यात्रा भत्ता नहीं मिलने की समस्या भी सामने रखी गई है। संघ ने प्रत्येक माह समय पर वेतन, महंगाई के अनुरूप वेतन वृद्धि और नियमानुसार यात्रा भत्ता देने की मांग की है।
प्रदेश के सभी 33 जिलों में आंदोलन
संघ के प्रांतीय आह्वान पर आंदोलन का विस्तार पूरे छत्तीसगढ़ में किया गया है। प्रदेश के जिन 33 जिलों में तकनीकी सहायक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं,
सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद
संघ के जिला अध्यक्ष शशांक सिंह परिहार ने बताया कि प्रांतीय आह्वान पर जिले के सभी ब्लॉकों में कार्यरत तकनीकी सहायक जिला मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर एकत्रित होकर अपनी मांगों और समस्याओं को सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायकों ने वर्षों तक योजना के सफल क्रियान्वयन में योगदान दिया है। अब सरकार को कर्मचारियों के लंबे सेवाकाल, कार्य की प्रकृति और उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण, विभागीय समायोजन और सेवा सुरक्षा के संबंध में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
संघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी तीन सूत्रीय मांगों और चार प्रमुख समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान करेगी। अब देखना होगा कि तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद शासन स्तर पर कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।



