युवा पत्रकार देशबन्धु नेताम देवभोग गरियाबंद
केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन का उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत करोड़ों रुपये के बजट का प्रावधान किया गया ताकि ग्रामीण अंचलों में पानी की किल्लत हमेशा के लिए दूर हो सके। लेकिन गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम खोकसरा में यह योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। यहां घटिया निर्माण कार्य और जिम्मेदार विभागों की उदासीन कार्यप्रणाली के चलते जल जीवन मिशन पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
धरातल पर बदहाल तस्वीरें और खोखले दावे
ग्राम खोकसरा में जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी निर्माण, पाइपलाइन विस्तार और नल कनेक्शन का कार्य किया गया था, लेकिन ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों के कारण योजना शुरू होने से पहले ही जर्जर हो चुकी है। कई जगहों पर पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, तो कहीं नल कनेक्शन से पानी की जगह सिर्फ हवा निकल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री घटिया सीमेंट, लोहे की छड़ें और लो क्वालिटी के पाइप का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप थोड़े ही दिनों में पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
गर्मी हो या बरसात, ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए पुराने पारंपरिक स्रोतों हैंडपंप, कुआं या झिरिया पर निर्भर रहने को विवश हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि गांव के लोगों को प्यास बुझाने के लिए संघर्ष करना पड़े तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित कार्यदायी एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। योजना के क्रियान्वयन के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा समय-समय पर गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई? क्या विभाग ने कागजों में ही सब कुछ ठीकठाक दिखाकर योजनाओं का भुगतान भी पास कर दिया है?
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि जब भी ठेकेदारों द्वारा मनमानी की जाती है, तब विभागीय अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। मॉनिटरिंग के अभाव में ठेकेदार मनमाने तरीके से काम कर गायब हो जाते हैं और खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। खोकसरा गांव में जल जीवन मिशन की यह बदहाली इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार किस हद तक हावी है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, की उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्राम खोकसरा के रहवासियों ने अब इस मामले को लेकर मुखर होना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार मौखिक शिकायत, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
सरकार ने हर घर पानी पहुंचाने का सपना दिखाया था, लेकिन खोकसरा में यह सपना सिर्फ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। कागजों में नल लग गए, पर एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। आखिर इस बर्बादी और लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
ग्रामवासियों का सामूहिक आक्रोश
निष्कर्ष और चेतावनी
जल जीवन मिशन जैसी जनहितकारी योजनाओं का इस तरह से फ्लाप होना ग्रामीण विकास की राह में एक बड़ा रोड़ा है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने इस मामले की सुध नहीं ली, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे
अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन और जिम्मेदार महकमा कुंभकर्णी नींद से जागता है या नहीं, और क्या खोकसरा में हुए गुणवत्ताहीन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी या मामला यूं ही फाइलों में दफन



