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October 21, 2026 4:52 am

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छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कालाहांडी के छिलपा में धूमधाम से निकली माँ द्वारशनी छतर यात्रा

युवा पत्रकार देशबन्धु नेताम देवभोग गरियाबंद 

छत्तीसगढ़ की सीमा से सते पड़ोसी राज्य ओडिशा के कालाहांडी जिले के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचल छिलपा में आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ क्षेत्र की आराध्य देवी माँ द्वारशनी की वार्षिक ‘छतर यात्रा’ का आयोजन अत्यंत धूमधाम और भव्यता के साथ किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों के सीमावर्ती गाँवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और माता के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई।

छत्तीसगढ़ सीमा पर गूंजे जयकारे

छिलपा गाँव छत्तीसगढ़ की सीमा के बेहद करीब स्थित होने के कारण इस यात्रा का महत्व दोनों राज्यों के निवासियों के लिए विशेष रहता है। पिछले कई दिनों से चल रही तैयारियों के बाद यात्रा के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों से बड़ी संख्या में पदयात्री, ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक वाद्ययंत्रों, ढोल-नगाड़ों और निशान के साथ छिलपा पहुँचे। पूरा क्षेत्र “माँ द्वारशनी की जय” और पारंपरिक लोक गीतों के जयकारों से गूंज उठा।

भव्य छतर यात्रा और अनुष्ठान

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद माँ द्वारशनी के भव्य ‘छतर’ को विशेष अनुष्ठान के बाद मुख्य मार्ग से होते हुए नगर भ्रमण और पारंपरिक मिलन स्थल की ओर ले जाया गया। छतर के साथ चल रहे पारंपरिक नर्तक दलों ने रंग-बिरंगे परिधानों में अपनी लोक कला का शानदार प्रदर्शन किया। ढोल की थाप और मादल की गूंज पर झूमते भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था।

मान्यता है कि माँ द्वारशनी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और क्षेत्र पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। इस यात्रा के दौरान मन्नत पूरी होने पर भक्तों द्वारा बकरे या अन्य पारंपरिक प्रतीकों के साथ माता को धन्यवाद ज्ञापित करने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुँचे थे।

सांस्कृतिक एकता और आपसी सौहार्द का प्रतीक

यह छतर यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती गाँवों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक मेल-मिलाप का एक बड़ा माध्यम भी है। दोनों राज्यों के लोग यहाँ बिना किसी भौगोलिक सीमा के भेद के एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। मेले के दौरान विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी थीं, जहाँ स्थानीय व्यंजनों, बच्चों के खिलौने और पूजन सामग्रियों की जमकर खरीददारी हुई।

शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन

भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों ओर से पहुँचे स्वयंसेवकों ने यातायात को सुचारू बनाए रखने और प्रसाद वितरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शांतिपूर्ण और अनुशासन के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर दोनों राज्यों के आपसी सौहार्द और पारंपरिक संस्कृति को और अधिक प्रगाढ़ किया है।

यात्रा के समापन पर महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। इस भव्य आयोजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है और ग्रामीण अभी से अगले वर्ष की छतर यात्रा की प्रतीक्षा में जुट गए हैं।

ATD News
Author: ATD News

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