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October 8, 2026 4:48 am

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लखनपुर क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का खेल ? अधिकारियों को अंधेरे में रखकर अनुमति लेने का आरोप, वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

लखनपुर। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम लोसगी में निजी भूमि से पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि चार सूखे आम के पेड़ों को काटने की अनुमति लेकर एक दर्जन से अधिक आम और खम्हार के पेड़ों की कटाई कर दी गई। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी तस्करों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे है

 

जानकारी के अनुसार ग्राम लोसगी निवासी कपिल गुप्ता ने निजी भूमि खसरा नंबर 86/3, रकबा 0.494 हेक्टेयर में पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति मांगी थी। आवेदन में भूमि पर 10 आम के पेड़ होने का उल्लेख करते हुए इनमें से चार सूखे आम के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई थी। बताया जा रहा है कि एसडीएम द्वारा 6 अगस्त को चार सूखे आम के पेड़ों की कटाई की अनुमति प्रदान की गई।

आरोप है कि अनुमति मिलने के बाद मौके पर चार सूखे पेड़ों के बजाय 15 से अधिक आम और खम्हार के पेड़ काट दिए गए। इतना ही नहीं, कटाई के बाद लकड़ी को ट्रकों के माध्यम से परिवहन किए जाने की भी बात सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ी तस्करों द्वारा अनुमति की आड़ में बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटाई की जा रही है।

टीपी के लिए 6 अक्टूबर को लगाया आवेदन

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पेड़ों की कटाई और लकड़ी परिवहन के बाद संबंधित लोग वन विभाग कार्यालय का चक्कर लगाते नजर आए। बताया जा रहा है कि लकड़ी के परिवहन के लिए टीपी (ट्रांजिट परमिट) जारी कराने हेतु 6 अक्टूबर 2026 को वन विभाग में आवेदन दिया गया।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अनुमति केवल चार सूखे आम के पेड़ों की कटाई की थी, तो मौके पर 15 से अधिक आम एवं खम्हार के पेड़ किस अनुमति के आधार पर काटे गए? यदि पेड़ निर्धारित अनुमति से अधिक काटे गए हैं तो क्या उनकी जांच मौके पर जाकर की गई? और यदि अवैध कटाई हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

वन विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टीपी परमिशन के नाम पर लकड़ी तस्कर अधिकारियों से साठ गांठ कर पैसा लेनदेन कर टीपी परमिशन होता है और टीवी परमिशन के आड़ लकड़ियों की भी तस्करी की जाती है। यही नहीं लकड़ी तस्करों के द्वारा ट्रैकों में लड़कियों को लौटकर उसके बाद टीपी परमिशन के लिए आवेदन वन विभाग कार्यालय में दिया जाता है बिना जांच के ही सेटिंग कर वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा उन्हें टीपी परमिशन की अनुमति दे दी जाती है।

अब देखना यह होगा कि वन विभाग और राजस्व विभाग मौके का निरीक्षण कर अनुमति में दर्ज पेड़ों और वास्तव में काटे गए पेड़ों की संख्या का मिलान करते हैं या नहीं। यदि जांच में अनुमति से अधिक पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम एवं अन्य प्रावधानों के तहत क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखने वाली बात होगी।सबसे बड़ा सवाल यही है कि चार सूखे पेड़ों की अनुमति लेकर यदि एक दर्जन से अधिक पेड़ काटे गए हैं, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई अधिकारियों की नजरों से कैसे बची?

इस संबंध में जब एसडीओ जिला सपना मुखर्जी से बात की गई तो उन्होंने टीपी से जुड़े ऐसे किसी भी आवेदन के विषय में अनभिज्ञता जताते हुए कहा की इस विषय में उन्हें जानकारी नहीं है और उन्होंने यह भी कहा कि अगर ट्रक में बिना टीपी लकड़ी लोड किया गया है तो ऐसा नहीं होना चाहिए इस विषय में मामले की जांच करने के बाद ही सारी बातें स्पष्ट तौर पर सामने आयेंगी।

वहीं इस विषय में रेंजर रामनिवास दहायत का कहना है की टीपी के लिए आवेदन किया गया है जिसे अंबिकापुर एसडीओ कार्यालय भेज दिया गया है।

प्रभारी SDM रामराज सिंह

इस संबंध में प्रभारी एसडीएम राम राज सिंह से बात करने पर उनके द्वारा कहा गया की चार सूखे पेड़ों का परमिशन दिया गया है। अगर अधिक पेड़ काटे हैं यह तो जांच का विषय इसकी जांच करा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ATD News
Author: ATD News

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