देवभोग. देश को संविधान, समानता और सामाजिक न्याय की राह दिखाने वाले भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा देवभोग मुख्यालय में आज खुद उपेक्षा और अंधेरे का दंश झेल रही है। विडंबना यह है कि जिस महापुरुष ने देश और समाज को शिक्षा एवं ज्ञान की रोशनी का संदेश दिया, उनकी प्रतिमा के आसपास ही शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। प्रतिमा स्थल पर समुचित प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल लंबे समय से बदहाल नजर आ रहा है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह स्थिति कोई नई नहीं है बल्कि करीब 10 वर्षों से प्रतिमा स्थल पर प्रकाश व्यवस्था का अभाव बना हुआ है। पहले ग्राम पंचायत के कार्यकाल में भी इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया और अब देवभोग नगर पंचायत बनने के डेढ़ साल बाद भी स्थिति जस के तस है।इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी के साथ-साथ निराशा भी है।
10 वर्षों की उपेक्षा जिम्मेदारों ने नहीं ली सुध
पिछले डेढ़ दशक से बाबा साहेब की प्रतिमा स्थल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन आवाज उठाते रहे हैं। इसके बावजूद नियमित विकास योजनाओं और स्थानीय स्तर की प्राथमिकताओं में यह स्थान अपनी जगह नहीं बना सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी शहर या कस्बे की पहचान केवल सड़क,नाली और भवनों से नहीं होती बल्कि वहां स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं और सार्वजनिक स्थलों का सम्मान भी उसकी सामाजिक चेतना को दर्शाता है। ऐसे में संविधान निर्माता की प्रतिमा के आसपास प्रकाश व्यवस्था तक नहीं होना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
नगर पंचायत बनने से जगी थी उम्मीद लेकिन तस्वीर अब भी जस की तस
देवभोग के नगर पंचायत बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि मुख्यालय के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों का व्यवस्थित विकास होगा। खासकर डॉ. अंबेडकर जैसे राष्ट्रनिर्माता की प्रतिमा के आसपास प्रकाश और सौंदर्यीकरण की व्यवस्था किए जाने की अपेक्षा थी।लेकिन लंबे समय से चली आ रही समस्या अब भी कायम है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पंचायत के माध्यम से इस स्थल का कायाकल्प आसानी से किया जा सकता है। प्रतिमा परिसर में पर्याप्त रोशनी, नियमित साफ-सफाई और आकर्षक सौंदर्यीकरण होने से यह स्थान न केवल गरिमापूर्ण दिखाई देगा बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन सकता है।
सम्मान की रोशनी का इंतजार
स्थानीय रहवासियों ने नगर पंचायत और संबंधित प्रशासन से मांग की है कि बाबा साहेब की प्रतिमा स्थल पर तत्काल उचित प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराया जाए। लोगों का कहना है कि यह पहल महज एक सार्वजनिक स्थल को रोशन करने तक सीमित नहीं होगी बल्कि संविधान निर्माता के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देगी। अब देखना यह है कि करीब 10 वर्षों से अंधेरे में खड़ी बाबा साहेब की प्रतिमा को नगर पंचायत कब सम्मान की रोशनी उपलब्ध कराती है।लोगों की उम्मीद है कि प्रशासन इस जनसरोकार से जुड़े मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस कदम उठाएगा ताकि देवभोग में संविधान निर्माता की प्रतिमा अंधेरे में नहीं सम्मान की रोशनी में चमकती नजर आए।



