अंबिकापुर/सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक और शर्मनाक मिसाल सामने आई है। राजपुर विकासखंड स्थित रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में ताला लगा होने और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के नदारद रहने के कारण एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस में ही प्रसव कराना पड़ा।
परिजन महिला को डिलीवरी के लिए घर से अस्पताल ले जा रहे थे। रास्ते में रेवतपुर PHC पड़ने पर वे तुरंत वहां पहुंचे, लेकिन गेट पर ताला लटका मिला। घंटों तक महतारी एक्सप्रेस अस्पताल के बाहर खड़ी रही। महिला दर्द से कराहती रही, परिजन ढाढ़स बंधाते रहे, लेकिन अस्पताल नहीं खुला। अंततः महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
प्रसव के काफी समय बाद स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल पहुंचे और मां-बच्चे को अंदर शिफ्ट किया गया। इस दौरान अस्पताल कर्मियों के आवास पर भी ताला लगा मिला। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया और ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मियों पर कार्रवाई करने का दावा किया।
लेकिन सवाल यह है कि एमबीबीएस डॉक्टर सहित कई स्वास्थ्य कर्मी होने के बावजूद अस्पताल कैसे तालाबंद रह सकता है? यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था और जवाबदेही की कमी को एक बार फिर उजागर करती है। कार्रवाई के नाम पर अक्सर खानापूर्ति होती रही है, जबकि ऐसी लापरवाहियां जिले में नई नहीं हैं।



