रायपुर. छत्तीसगढ़ में कस्टम राइस मिलिंग घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को राम गोपाल अग्रवाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है. एजेंसी की जांच में चावल मिलर्स से प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है. इस मामले में रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने आरोपी को पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया है.
ED की 12 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मामले में लगभग 147 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली की गई थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस रकम की वसूली दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच की गई. मामले की आगे जांच जारी है.
₹40 से बढ़ाकर ₹120 प्रति क्विंटल किया गया था प्रोत्साहन
ED की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के दौरान कस्टम राइस मिलिंग के लिए मिलने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि को 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद छत्तीसगढ़ राज्य राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों और मार्कफेड के अधिकारियों से जुड़े कथित नेटवर्क ने प्रोत्साहन राशि जारी कराने के बदले चावल मिलर्स से प्रति क्विंटल 20 रुपये की दर से नकद रकम वसूली.
आरोप है कि जिन मिलर्स ने कथित तौर पर यह रकम देने से इनकार किया, उनके बिल जानबूझकर रोक दिए गए। ED के मुताबिक, इसी तरीके से दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच करीब 147 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई.
राम गोपाल अग्रवाल की क्या थी कथित भूमिका..?
ED की प्रेस विज्ञप्ति में राम गोपाल अग्रवाल पर कथित अवैध वसूली की व्यवस्था को संगठित करने, उसकी निगरानी करने और उसे नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है.
जांच एजेंसी के अनुसार, चावल मिलर्स से रकम एकत्र करने के लिए राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के माध्यम से निर्देश दिए जाते थे. अलग-अलग जिलों से एकत्र की गई रकम का ब्योरा एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर द्वारा राम गोपाल अग्रवाल को उपलब्ध कराए जाने का भी दावा किया गया है.
ED के मुताबिक, जिलेवार वसूली का हिसाब सत्यापन के लिए प्रस्तुत किया जाता था और कथित तौर पर एकत्र नकदी बाद में राम गोपाल अग्रवाल द्वारा नामित व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी.
हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं. मामले में आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुष्टि होना बाकी है.
आयकर विभाग की शिकायत से शुरू हुई जांच
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ED ने इस मामले में जांच आयकर विभाग की ओर से दायर अभियोजन शिकायत के आधार पर शुरू की थी. इसके बाद रायपुर के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW) ने भी भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत FIR दर्ज की थी.
इसी मामले में कथित अवैध वसूली से अर्जित रकम को अपराध से प्राप्त आय मानते हुए ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाई.
पूछताछ में सहयोग नहीं करने का आरोप
ED का कहना है कि जांच के दौरान राम गोपाल अग्रवाल कथित वसूली, रकम के लेन-देन, उसके प्रबंधन और उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देने में टालमटोल कर रहे थे तथा सहयोग नहीं कर रहे थे.
एजेंसी के अनुसार, इसी आधार पर उन्हें 9 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया और रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें पांच दिन की ED हिरासत में भेजने का आदेश दिया.
147 करोड़ की कथित वसूली, अब आगे क्या..?
छत्तीसगढ़ के कस्टम राइस मिलिंग मामले में करीब 147 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा और अहम हो गया है. अब जांच एजेंसी कथित वसूली की पूरी व्यवस्था, रकम के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
फिलहाल ED की जांच जारी है. आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से इस कथित वसूली नेटवर्क के अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकता है.



