सरगुजा। लखनपुर विकासखंड के विभिन्न गांवों में पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में सेमर, यूकेलिप्टस, आम सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों की कटाई की जा रही है। कटाई के बाद लकड़ियों को ट्रकों के माध्यम से दूसरे क्षेत्रों में ले जाकर बिक्री किए जाने की भी बात सामने आ रही है।
मामला लखनपुर क्षेत्र के ग्राम कटिंदा और ग्राम लोसगी से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा किसानों को कथित तौर पर झांसे में लेकर आम के पेड़ों की कटाई कराई गई। वहीं कटाई के बाद लकड़ियों को ट्रक में लोड कर परिवहन की तैयारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर पेड़ों की कटाई के लिए संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति लिए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद लकड़ी के परिवहन के लिए आवश्यक दस्तावेज और टीपी (ट्रांजिट परमिट) की प्रक्रिया किए जाने की बात कही जा रही है। इसी वजह से ग्रामीण पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल…
स्थानीय लोगों ने वन विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई, अनुमति, टीपी और लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर कटाई की वैधता की जांच करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में काटे गए पेड़ों की संख्या, संबंधित भूमि का विवरण, कटाई की अनुमति और लकड़ी के परिवहन के लिए जारी टीपी की जांच महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन और मौके का निरीक्षण होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रभारी एसडीएम रामराज सिंह ने कहा—कल जानकारी दूंगा…
इस संबंध में प्रभारी एसडीएम रामराज सिंह से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि वे आज ही आए हैं और मामले की जानकारी उन्हें अभी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे कल इस संबंध में जानकारी देंगे तथा पुलिस
तत्कालीन एसडीएम फागेश सिन्हा ने जताई अनभिज्ञता
वहीं तत्कालीन उदयपुर एसडीएम फागेश सिन्हा से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उनका स्थानांतरण हो चुका है और वर्तमान में वे बलौदा बाजार में पदस्थ हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वर्तमान एसडीएम से इस संबंध में चर्चा की जाए।
रेंजर रामनिवास दहायत का पक्ष…
इस संबंध में रेंजर रामनिवास दहायत ने बताया कि पेड़ों की कटाई के लिए एसडीएम से अनुमति ली गई है। उन्होंने कहा कि टीपी परमिशन के लिए सतेंद्र यादव द्वारा वन विभाग कार्यालय लखनपुर में आवेदन दिया गया है। आवेदन को आगे की अनुमति के लिए एसडीओ कार्यालय भेजा जाएगा।
अब जांच और दस्तावेजों के सत्यापन पर नजर
मामले में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप और वन विभाग के रेंजर द्वारा दी गई जानकारी के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए अनुमति पत्र, कटाई की स्वीकृति, संबंधित भूमि का रिकॉर्ड और टीपी से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन अहम होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित पेड़ों की कटाई और लकड़ी का परिवहन नियमों के अनुरूप है या नहीं।



