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October 25, 2026 12:41 am

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झीरम घाटी कांड: NIA कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने बताया आधा-अधूरा न्याय, जांच पर उठाए गंभीर सवाल

अंबिकापुर. झीरम घाटी हमले के 13 वर्ष बाद आये NIA कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने आधा अधूरा न्याय बतलाते हुए इसके लिये इस घटना की जांच करने वाली NIA को इसका जिम्मेदार बतलाया है। न्यायालय के फैसले के बाद प्रदेश के अन्य जिला मुख्यालयों के साथ ही साथ सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने भी राजीव भवन में इस विषय पर पत्रकार वार्ता की। वार्ता को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि एन आई ए शुरुआत से ही इस मामले में जानबूझकर दिशाहीन जांच कर रही थी। उन्होंने कहा कि NIA ने अपनी जांच को छोटे नक्सलियों तक सीमित रखा, इस मामले में संलिप्त बड़े नक्सली नेताओं की गिरफ्तारी और समर्पण के बावजूद उनके विरुद्ध न तो चार्जशीट दाखिल की गई न ही उनसे पूछताछ कर इस हमले के पीछे के राजनीतिक षड्यंत्र को उजागर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव जो परिवर्तन यात्रा के संयोजक थे ने कई ऐसे साक्ष्य NIA को दिये जो इस घटना में षड़यंत्र की ओर इशारा करते हैं। घटना में आहत लोगों और रिपोर्ट कर्ता तक का बयान NIA ने नहीं लिया। पार्टी हाईकमान को पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने बतलाया था कि जिस रूट से परिवर्तन यात्रा गुजर रही थी उस रूट पर सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। राज्य सरकार ने इस चूक पर पर्दा डालने के उद्देश्य से यह अफवाह फैलाया की जिला प्रशासन की जानकारी के बगैर अंतिम समय में यात्रा का रूट बदला गया। ऐसा प्रतीत होता है कि NIA की जांच का मुख्य लक्ष्य असली षड्यंत्र और षडयंत्रकारियो को छुपाना था।

प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष जे पी श्रीवास्तव ने कहा कि यह सवाल उठाया जाता है कि कांग्रेस के शासन काल मे इस घटना की जांच क्यों नहीं हुई। सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने शासन के दौरान एस आई टी का गठन किया था, लेकिन तब NIA ने इस जांच में रोड़े अटकाते हुए इस आई टी के जांच पर न्यायालय से स्टे हासिल किया था। आज सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद की इस आई टी मामले की जांच कर सकती है, विष्णु देव सरकार ढाई साल से चुप्पी साधे हुए है।

प्रेसवार्ता में निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के निर्णय का सम्मान करती है। न्यायालय ने वही निर्णय लिया जैसा NIA ने विवेचना की। हमारा सवाल भाजपा सरकार और NIA से है कि उन्होंने किस उद्देश्य से इस मामले के तह तक जांच नहीं कि, जिससे कि इस हमले में शामिल प्रमुख नक्सली और कोई अदृश्य षड्यंत्र कर्ता बच निकले। उन्होंने कहा कि हमले में शामिल प्रमुख नक्सली कमांडर जैसे गणपति और रमन्ना जिनका नाम FIR में था का नाम चार्जशीट से हटाना NIA पर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएगी।

अंत मे प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री द्वितेंद्र मिश्रा ने कहा कि13 वर्ष के बाद आये यह फैसला इस दृष्टि से निराशाजनक है क्योंकि जांच करने वाली NIA ने अपनी विवेचना में दोषियों के सामने कम लाया छुपाया अधिक। भाजपा के राज में इस घटना को लेकर जो लीपापोती की गई है वो कहीं न कहीं यह इशारा करती है कि इस मामले के तार तत्कालीन भाजपा सरकार से जुड़े हुए थे। इस दौरान 20 सूत्रीय कार्यक्रम के पूर्व उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, हेमंत सिन्हा, मो इस्लाम, इंद्रजीत सिंह धंजल, नुरुल अमीन सिद्दकी, लोकेश कुमार, जमील खान, नरेंद्र विश्वकर्मा, दिनेश शर्मा, आशीष जायसवाल, अविनाश कुमार, विकास शर्मा आदि उपस्थित रहे।

ATD News
Author: ATD News

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