पत्रकार देशबन्धु नेताम
देवभोग (गरियाबंद)
गरियाबंद जिले के सीमावर्ती वनांचल क्षेत्र देवभोग में पुलिस विभाग द्वारा सामाजिक सौहार्द, सुरक्षा और जन-जागरूकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। रक्षाबंधन के पावन पर्व के अवसर पर देवभोग पुलिस थाना परिसर में ‘राखी संग खाकी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही बढ़ते डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाने और आम जनता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एक वृहद ‘साइबर जागरूकता अभियान’ भी चलाया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, और पत्रकार बंधु बड़ी संख्या में शामिल हुए।
खाकी के साथ रिश्तों की मिठास: ‘राखी संग खाकी’
कार्यक्रम का शुभारंभ थाना परिसर में आए अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों व जवानों की कलाई पर रक्षासूत्र राखी बांधकर उनके लंबे व सुरक्षित जीवन की कामना की।
दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और उत्साहवर्धक रहा। अपनी बहनों की रक्षा के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण बनाए रखने का संकल्प दोहराया। इस पहल ने पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम करते हुए विश्वास और अपनेपन का एक नया संदेश दिया।
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साइबर अपराधों से सुरक्षा का दिया गया संदेश
‘राखी संग खाकी’ के भावुक पलों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने जनहित को ध्यान में रखते हुए साइबर सुरक्षा पर विशेष सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम में उपस्थित देवभोग थाना प्रभारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की और उपस्थित लोगों को इससे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी किस तरह नए-नए हथकंडों का इस्तेमाल कर लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रमुख साइबर अपराधों और उनसे बचाव के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई:
ओटीपी और पिन साझा न करना: पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड नहीं मांगता। किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ यह जानकारी साझा न करें।
अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें: व्हाट्सएप, एसएमएस या सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने ऑफर, लॉटरी या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। यह आपके फोन का डेटा चुराने या बैंक खाता खाली करने का जरिया हो सकता है।
फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट: अनजान नंबरों से आने वाली धमकियों या “डिजिटल अरेस्ट” जैसी फर्जी कॉल से डरने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों की तुरंत पुलिस में शिकायत करें।
हेल्पलाइन नंबर 1930 का उपयोग: यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत दर्ज कराने से ठगे गए पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों की रही सराहनीय भूमिका
इस दोहरे अभियान में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय पत्रकारों ने सक्रिय भूमिका निभाई। जनप्रतिनिधियों ने पुलिस विभाग की इस जनहितैषी पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि ‘राखी संग खाकी’ जैसे आयोजन से समाज में पुलिस के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनता है।
वहीं, कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों ने भी साइबर जागरूकता को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। पत्रकारों ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण है और साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने में वे पुलिस का पूर्ण सहयोग करेंगे। देवभोग पुलिस ने भी मीडिया जगत को समाज और प्रशासन के बीच की मजबूत कड़ी बताते हुए उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
जन-विश्वास और सुरक्षा का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में देवभोग पुलिस द्वारा उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और महिला प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह एवं उपहार भेंटकर सम्मानित किया गया।
थाना प्रभारी ने अपने संबोधन में कहा कि देवभोग पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही नहीं, बल्कि हर सुख-दुख में क्षेत्र की जनता के साथ खड़ी है। साइबर अपराधों के इस दौर में सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार ‘जागरूकता’ ही है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे स्वयं सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।
यह पूरा आयोजन न केवल रक्षाबंधन के पर्व की खुशियों से सराबोर रहा, बल्कि इसने समाज में सुरक्षा, विश्वास और साइबर सतर्कता का एक नया अध्याय भी लिखा।



