देशबन्धु नेताम देवभोग गरियाबंद
श्रावण सोमवार के पावन अवसर पर अंचल के प्रसिद्ध एवं प्राचीन खोकसरा शिव मंदिर में आस्था और भक्ति का भव्य जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा मंदिर परिसर “बोल बम, हर-हर महादेव” और “जय शिव शंभू” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर पड़ोसी राज्य सेमला ओडिशा के कालाहांडी जिले से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं नाग बम की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
कालाहांडी से खोकसरा तक की कठिन पैदल यात्रा
ओडिशा के कालाहांडी से पहुंचे नाग बम श्रद्धालुओं ने विभिन्न पवित्र नदियों से जल उठाकर मीलों लंबी पैदल यात्रा तय की। हाथ में कंवर, मन में अटूट भक्ति और जुबां पर बाबा भोलेनाथ का नाम लिए ये कांवरिया नंगे पांव खोकसरा शिव मंदिर पहुंचे। कड़ी धूप और शारीरिक थकान के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। कांवड़ियों का मानना है कि भगवान शिव की सेवा और जलाभिषेक से जीवन के समस्त दुखों का निवारण होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
नाग बमों का विशेष आकर्षण और अनुष्ठान
कालाहांडी से आए ‘नाग बम’ श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया। नाग बम परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने पारंपरिक परिधानों और विशेष धार्मिक नियमों का पालन करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित किया। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में दंडवत प्रणाम करते हुए अपनी यात्रा पूरी की। उनके इस कठिन संकल्प और अटूट श्रद्धा को देखकर स्थानीय ग्रामीण व अन्य दर्शनार्थी भावविभोर हो गए।
मंदिर समिति और ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत
ओडिशा से आए अतिथियों व कांवड़ियों के लिए खोकसरा मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। सीमा पार कर पहुंचे नाग बम श्रद्धालुओं का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर और ‘बोल बम’ के जयकारों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग में कांवरियों के विश्राम, स्वास्थ्य जांच, शीतल पेयजल और महाप्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई थी।
सुरक्षा व व्यवस्था के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वार पर पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं, ताकि सभी भक्त सुगमता से जलाभिषेक कर सकें। शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ स्थानीय स्वयंसेवक भी निरंतर तैनात रहे।
अंचल में भक्तिमय वातावरण
खोकसरा शिव मंदिर में तड़के सुबह से शुरू हुआ जलाभिषेक का सिलसिला देर शाम तक अनवरत जारी रहा। मंदिर के चारों ओर बज रहे धार्मिक भजनों, धूप-अगरबत्ती की महक और कांवरियों की गूंज ने पूरे क्षेत्र को शिवमय बना दिया। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के इस अंतरराज्यीय सांस्कृतिक व धार्मिक संगम ने दोनों क्षेत्रों के बीच भ्रातृभाव और अटूट आस्था की मिसाल पेश की है।



