अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ‘सुशासन त्यौहार’ के नाम पर सरकारी अफसरों ने तहलका मचा दिया है। जहां आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और आधारभूत समस्याओं से जूझ रही है, वहीं अधिकारी शिक्षा के मंदिरों को चिकन पार्टी का अड्डा बना रहे हैं।
साड़बार आंगनबाड़ी केंद्र में चिकन पार्टी का आयोजन किया गया, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी खुलकर शामिल हुए। अफसरों की इस शानदार पार्टी में चिकन, शराब और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का भरपूर आनंद लिया गया। सूत्रों के अनुसार, पार्टी काफी देर तक चली और अधिकारी पूरी तरह से मौज में डूबे नजर आए।
इसी तरह हर्रा टिकरा के स्कूल में भी दूसरी पार्टी का आयोजन किया गया। शिक्षा के पवित्र स्थल को पिकनिक स्पॉट बनाकर अफसरों ने सुशासन का मजाक उड़ाया है।
आम जनता की समस्याएं अनसुनी, अफसरों की मौज जारी…
जनता की शिकायत है कि छोटी-छोटी समस्याओं का निराकरण करने के बजाय अधिकारी ‘सुशासन त्यौहार’ के नाम पर सरकारी खर्च पर पार्टी और पिकनिक मना रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण और महिलाओं की सुरक्षा जैसी गंभीर जिम्मेदारियों के बजाय चिकन पार्टी चल रही है।
यह घटना सुशासन की बड़ी विडंबना है। एक तरफ सरकार लगातार सुशासन और पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके अधिकारी जनता के पैसे पर चिकन पार्टी का आनंद ले रहे हैं।
विपक्ष ने किया हमला
इस घटना पर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और जनता के प्रति उदासीनता का प्रतीक बताया। स्थानीय लोग भी आक्रोशित हैं और पूछ रहे हैं- “क्या सुशासन का मतलब यही है..?”
सवाल उठते हैं:
आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूलों में पार्टी का आयोजन किसके निर्देश पर हुआ..?
पार्टी का खर्च कौन उठा रहा है..?
क्या महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी जवाबदेह बनाए जाएंगे..?
अंबिकापुर की यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है। जनता अब सवाल कर रही है कि सुशासन त्यौहार असल में जनसेवा का त्यौहार है या अफसरों का चिकन पार्टी महोत्सव..?





