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October 4, 2026 5:22 am

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ग्राम पंचायत की भूमि पर कब्जा हटाने की मांग के विरोध में वर्षों से रह रहे ग्रामीणों में आक्रोश

सरगुजा/सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत कल्याणपुर में पंचायत की भूमि से कथित कब्जा हटाने को लेकर सरपंच एवं ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। वहीं, दूसरी ओर जिन परिवारों के मकान और दुकानें इस भूमि पर लंबे समय से मौजूद हैं, उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां निवास करते आ रहे हैं और उनके पूर्वज भी इसी स्थान पर रहते थे। ऐसे में अचानक मकान खाली करने की कार्रवाई से उनके सामने आशियाना और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्राम पंचायत कल्याणपुर के सरपंच गोवर्धन सिंह एवं ग्रामीणों द्वारा 24 सितंबर से धरना दिया जा रहा है। सरपंच की मांग है कि पंचायत की भूमि से कब्जे हटाकर वहां नई दुकानों का निर्माण कराया जाए, जिससे पंचायत की आय बढ़े और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।
सरपंच के अनुसार, वर्ष 2012-13 में ग्राम पंचायत को वन अधिकार के तहत भूमि का पट्टा मिला था। पंचायत का आरोप है कि कुछ लोगों ने इस भूमि पर मकान और दुकानें बना ली हैं तथा कुछ परिसरों को किराए पर दिया जा रहा है।
हालांकि, लंबे समय से यहां रह रहे ग्रामीण इस कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष रखते हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार पीढ़ियों से इस स्थान पर निवास करते आ रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी मेहनत और जमा पूंजी से मकान बनाए हैं तथा इन्हीं दुकानों अथवा छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अचानक मकान और दुकानें खाली करने के लिए कहा जाता है तो वे अपने परिवारों को लेकर कहां जाएंगे, यह बड़ा सवाल है।
कब्जाधारी ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि को लेकर कोई विवाद है तो प्रशासन को पहले दस्तावेजों और वर्षों से चले आ रहे कब्जे की स्थिति की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि केवल धरने या ग्राम सभा के निर्णय के आधार पर वर्षों से बसे परिवारों को बेघर करना उचित नहीं होगा और उन्हें अपना पक्ष रखने तथा न्याय पाने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
वहीं, खसरा नंबर 2386 को लेकर भी पुराना विवाद सामने आया है। बताया गया कि वर्ष 2001 में यहां 19 दुकानों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन एक व्यक्ति द्वारा करीब 80 वर्ष पुराने कब्जे का हवाला देकर न्यायालय जाने के बाद मामला उलझ गया। इसी दौरान दुकानों के सामने लोगों के बसने की स्थिति बनी और अब वहां रह रहे परिवारों को हटाने की मांग की जा रही है।
आज हुई ग्राम सभा में कब्जाधारियों से स्वेच्छा से कब्जा हटाने की बात कही गई। इसके बाद प्रशासन के माध्यम से कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई है। दूसरी ओर, प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे बिना उचित जांच, सुनवाई और वैकल्पिक व्यवस्था के अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की गई या उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे भी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों के पुनर्वास और उनके अधिकारों पर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

ATD News
Author: ATD News

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