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October 1, 2026 4:39 am

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मुडघेमाल से दाबरीगुड़ा में जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को मजबूर ग्रामीण और स्कूली बच्चे, जर्जर पुलिया बनी काल

मैनपुर रिपोर्टर उपेन्द्र सोरी

विकास के बड़े-बड़े दावों और वादों के बीच गरियाबंद जिले के आदिवासी अंचल मैनपुर क्षेत्र से एक डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। मुड़घेलमाल से दावरीगुड़ा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग ग्रामीणों और स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए हादसों का मार्ग बन चुका है। मार्ग पर स्थित नाले की पुलिया पूरी तरह से टूटकर ध्वस्त हो चुकी है, जिसके कारण हर दिन स्कूली बच्चे और राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल और अपने गंतव्य तक जाने के लिए मजबूर हैं।

जर्जर पुलिया बनी हादसे का सबब

मुड़घेलमाल-दावरीगुड़ा मार्ग क्षेत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, जिससे होकर दावरीगुड़ा, मुड़घेलमाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों लोग रोजाना आना-जाना करते हैं। नाले पर बनी पुलिया का एक बड़ा हिस्सा ढह चुका है और उसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। जब नाले में पानी का बहाव तेज होता है, तब यह टूटा हुआ पुल दिखाई भी नहीं देता। बावजूद इसके, अन्य कोई सुलभ वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों और बच्चों को इसी टूटे हुए पुल से गुजरना पड़ता है।

स्कूली बच्चों के भविष्य और जीवन पर मंडराता खतरा

सबसे दयनीय और चिंताजनक स्थिति प्राथमिक, माध्यमिक व हाई स्कूल जाने वाले मासूम छात्र-छात्राओं की है। हाथ में बस्ता और मन में पढ़ाई की उम्मीद लिए ये छोटे-छोटे बच्चे रोज मौत के इस रास्ते से गुजरते हैं। कई बार बच्चे टूटे हुए मलबे और लोहे की छड़ों में उलझकर गिर जाते हैं, जिससे उन्हें चोटें भी आई हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक उनके बच्चे स्कूल से घर सुरक्षित वापस नहीं लौट आते, तब तक उनके दिल में एक अनजाना डर बना रहता है।

एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं का संपर्क कटा

पुलिया टूटने से न केवल स्कूली बच्चे प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं भी ठप हो गई हैं। गांव तक 108 संजीवनी एक्सप्रेस या 102 एंबुलेंस जैसी गाड़ियां नहीं पहुंच पाती हैं। किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने, प्रसव का मामला होने या आपात स्थिति में मरीज को खाट या कांवड़ में लादकर नाला पार कराना पड़ता है। इसके अलावा, गांव में राशन, सब्जी और अन्य दैनिक जरूरतों की सामग्री पहुंचाने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस टूटी हुई पुलिया और जर्जर मार्ग की मरम्मत

की जाये ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे या किसी मासूम शिकार ना हो

अब देखना यह होगा की समाचार प्रकाशन होने के बाद कितने दिनों के अंदर स्थानीय जनप्रतिनिधि टूटी हुई पूल मरम्मत कर स्कूली छात्रा छात्राओं को वह राहगीर को कितने दिनों के अंदर निजात दिलाते है

ATD News
Author: ATD News

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