गरियाबंद : गरियाबंद जिले के सीमावर्ती ब्लॉक देवभोग के अंतर्गत आने वाले ग्राम खोकसरा से एक दिलचस्प सांस्कृतिक व कलात्मक खबर सामने आ रही है। जमीनी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी तीखी कलम और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्र के युवा पत्रकार देशबन्धु नेताम इन दिनों हिन्दी संगीत के रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं। संगीत प्रेमी पत्रकार नेताम का दिल हिन्दी के एक भावुक गीत— “दिल मेरा भी रोता है, दिल मेरा भी दुखता है” पर ऐसा आया है कि वे इसके दीवाने हो गए हैं।
क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाले देशबन्धु नेताम की दिनचर्या में अब संगीत का यह दौर एक नया अध्याय जोड़ रहा है। खोकसरा और आसपास के ग्रामीणों व सहयोगियों का कहना है कि काम के भारी दबाव और व्यस्त दिनचर्या के बीच जब भी नेताम को थोड़ा समय मिलता है, वे इस लोकप्रिय और भावुक हिन्दी गीत को सुनना बेहद पसंद करते हैं। इस गीत के गहरे बोल और सुरीली धुन ने न केवल उन्हें बल्कि उनके माध्यम से क्षेत्र के कई अन्य युवाओं और संगीत प्रेमियों को भी प्रेरित किया है।
पत्रकारिता के कठोर रुख के पीछे एक संवेदनशील हृदय
पत्रकार देशबन्धु नेताम का कहना है कि पत्रकारिता का क्षेत्र चुनौतियों और तनाव से भरा होता है। समाज की समस्याओं को सामने लाने और आम जनता को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में कई बार मानसिक और भावनात्मक रूप से थकान महसूस होती है। ऐसे समय में संगीत ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
गीत के बोल “दिल मेरा भी रोता है, दिल मेरा भी दुखता है” पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह गाना केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह हर उस व्यक्ति की छिपी हुई संवेदनाओं और दर्दों को बयां करता है जो बाहर से मजबूत और अंदर से बेहद भावुक होता है। यह गीत इंसान के भीतर की मानवीय भावनाओं को जीवित रखता है।
खोकसरा और देवभोग अंचल में चर्चा का विषय
युवा पत्रकार का संगीत के प्रति यह प्रेम खोकसरा सहित समूचे देवभोग अंचल में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय साथियों का कहना है कि देशबन्धु नेताम का यह अंदाज़ दर्शाता है कि एक पत्रकार समाज के कड़े पहलुओं की रिपोर्टिंग करने के साथ-साथ एक बेहद संवेदनशील और कलाप्रेमी हृदय भी रखता है। संगीत के प्रति उनके इस अनोखे जुड़ाव की सराहना अब ग्रामीण और युवा वर्ग भी खुले दिल से कर रहा है।



