उपेंद्र सोरी
देवभोग गरियाबंद
क्षेत्र में विकास कार्यों और सड़क मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक ताजा मामला सामने आया है। डूंमरबाहाल से केनदुबन्द को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की मरम्मत के नाम पर पंचायत ने लाखों रुपये का गोलमाल कर दिया। भ्रष्टाचार की इस ‘कच्ची नींव’ की पोल मानसून की पहली ही बारिश ने खोलकर रख दी है। महज कुछ घंटों की बरसात में पूरी सड़क कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे इस मार्ग पर ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह से दूभर हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कुछ ही महीनों पहले इस मार्ग पर मुरम डालकर सड़क सुधारीकरण का दावा किया गया था। कागजों पर लाखों रुपये का बजट खर्च दिखाकर सड़क को पूरी तरह से दुरुस्त और चलने लायक घोषित कर दिया गया। लेकिन धरातल पर गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर केवल खानापूर्ति की गई। घटिया स्तर की मुरम लीपापोती का नतीजा यह हुआ कि बारिश होते ही मिट्टी बह गई और सड़क दलदल में बदल गई।
वर्तमान में स्थिति यह है कि डूंमरबाहाल-केनदुबन्द मार्ग पर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसलकर गिर रहे हैं, जिससे कई लोग चोटिल हो चुके हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या महतारी एक्सप्रेस जैसी गाड़ियों का इस गांव तक पहुँचना नामुमकिन हो गया है। क्षेत्र का संपर्क एक तरह से कट सा गया है।
ग्रामीणों में प्रशासन और जिम्मेदार के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का स्पष्ट आरोप है कि मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये को मिलीभगत से बंदरबांट कर लिए गए। यदि निर्माण कार्य में थोड़ी भी ईमानदारी बरती गई होती, तो पहली ही बारिश में सड़क का यह हाल न होता।
क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि डूंमरबाहाल-केनदुबन्द मार्ग के सुधारीकरण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। भ्रष्टाचार में लिप्त संबंधित पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनसे राशि की वसूली की जाए। साथ ही, ग्रामीणों की सहूलियत को देखते हुए जल्द से जल्द इस मार्ग पर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को इस नारकीय जीवन से राहत मिल सके। अब देखना यह होगा की समाचार प्रकाशन होने के बाद कितने दिनों के अंदर विभागीय अधिकारी शुद्ध लेना मुनासिब समझेंगे



