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September 9, 2026 4:40 pm

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ललित शुक्ला की निगरानी में शिवपुर कन्या एकलव्य विद्यालय में लापरवाही क्यों..? छात्राओं के पैदल मार्च के बाद उठे बड़े सवाल

अम्बिकापुर. कन्या एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर, बतौली की छात्राओं के 7 सितंबर को पैदल मार्च की घटना ने आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. छात्राओं को आखिर विद्यालय से पैदल मार्च की स्थिति तक क्यों पहुंचना पड़ा..? यदि विद्यालय की व्यवस्थाओं और छात्राओं की समस्याओं की नियमित निगरानी हो रही थी, तो शिकायतें समय रहते क्यों नहीं सुलझाई गईं..?
मामले में प्रशासन ने जांच समिति गठित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव को आगामी आदेश तक सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय में संलग्न कर दिया है. छात्रावास अधीक्षक आयुषी सोनी को भी शासकीय कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. वहीं प्रतीक्षा त्रिपाठी को प्राचार्य का दायित्व सौंपा गया है.

लेकिन कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है. विभाग के अधीन संचालित आवासीय विद्यालय में छात्राओं को अपनी समस्याओं को लेकर पैदल मार्च करना पड़ा, तो विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई..? विद्यालय की व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग किस स्तर पर की जा रही थी और जिम्मेदार अधिकारियों से समय-समय पर जवाबदेही क्यों नहीं तय की गई..?
प्राचार्य पर कार्रवाई, लेकिन निगरानी तंत्र पर सवाल क्यों नहीं..?
प्रशासन ने विद्यालय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि यदि प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक की कार्यप्रणाली में लापरवाही सामने आती है, तो उनके कामकाज की निगरानी करने वाले उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी या नहीं..?
खासकर तब, जब मामला आदिवासी छात्राओं के लिए संचालित आवासीय विद्यालय का हो. छात्राओं को बेहतर शिक्षा, भोजन, आवास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विभाग की है. ऐसे में घटना के बाद केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई से क्या पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय हो पाएगी..?

क्या राजनीतिक संरक्षण का भी कोई सवाल है..?
मामले के सामने आने के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या सहायक आयुक्त ललित शुक्ला को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है..? हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट तथ्य या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, इसलिए इस सवाल को जांच के दायरे में लाया जाना जरूरी है. यदि किसी स्तर पर राजनीतिक दबाव या संरक्षण है, तो जांच में इसकी भी निष्पक्षता से पड़ताल होनी चाहिए.
फिलहाल प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है. अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं कि छात्राओं को पैदल मार्च की नौबत क्यों आई, विद्यालय में लापरवाही किस स्तर पर हुई और क्या जिम्मेदारी केवल प्राचार्य एवं छात्रावास अधीक्षक तक सीमित रहेगी या विभागीय निगरानी तंत्र की भी जवाबदेही तय होगी.

“प्राचार्य पर कार्रवाई हुई, अधीक्षक को नोटिस मिला, लेकिन सवाल यह है कि सहायक आयुक्त ललित शुक्ला की निगरानी में चल रहे तंत्र की जवाबदेही कौन तय करेगा..?”

ATD News
Author: ATD News

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