अंबिकापुर। जिस प्रशासन की जिम्मेदारी बच्चों और छात्राओं की समस्याओं को समय रहते सुनकर उनका समाधान करना है, उसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सोमवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। बतौली ब्लॉक के शिवपुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की छात्राएं हॉस्टल की विभिन्न समस्याओं और विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ शिकायत लेकर करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर अंबिकापुर पहुंचीं। कलेक्ट्रेट पहुंचते ही एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई।
छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल की व्यवस्थाओं सहित कई समस्याओं को लेकर वे लंबे समय से शिकायत करती आ रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इसके बाद छात्राओं ने सीधे कलेक्टर से मिलने का फैसला किया और सोमवार सुबह पैदल अंबिकापुर के लिए निकल पड़ीं।
छात्राओं के पैदल मार्च की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। अधिकारियों को बीच रास्ते में भेजकर छात्राओं को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन छात्राएं कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़ी रहीं। कलेक्ट्रेट परिसर से कुछ दूरी पहले प्रशासन की ओर से छात्राओं के लिए बस की व्यवस्था की गई, जिसके बाद उन्हें कलेक्ट्रेट लाया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के दौरान गर्मी और लंबी दूरी तय करने के कारण एक छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। इससे प्रशासनिक व्यवस्थाओं और छात्राओं की शिकायतों को लेकर सवाल और गंभीर हो गए।
छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल की बिजली व्यवस्था सहित अन्य समस्याओं और विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी शिकायतों को लेकर वे लंबे समय से परेशान हैं। उनका कहना है कि जब बार-बार शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो मजबूर होकर उन्हें कलेक्टर से सीधे मिलने के लिए पैदल अंबिकापुर आना पड़ा।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने उठाए सवाल
मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि आदिवासी अंचलों में छात्र-छात्राओं की सुविधाओं के लिए शासन की ओर से राशि का आवंटन किया जाता है, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण उसका लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की बात कही।
कलेक्टर बोले- तीन मांगों को लेकर पहुंची थीं छात्राएं
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि छात्राएं बिजली व्यवस्था सहित तीन मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं।
बड़ा सवाल
छात्राओं की शिकायतें यदि समय रहते सुनी जातीं और उनका समाधान किया जाता, तो क्या उन्हें अपनी समस्याएं बताने के लिए करीब 30 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय आना पड़ता? छात्राओं का यह पैदल मार्च केवल हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर सवाल नहीं खड़ा करता, बल्कि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में संचालित आवासीय विद्यालयों की निगरानी, शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।



