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August 15, 2026 1:23 am

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“भुट्टा बेचती आरती में दिखी आत्मनिर्भर मैनपाट की तस्वीर”

आत्म -निर्भरता 

(लेख)/राजेंद्र रंजन गायकवाड़

कल अपने मित्रों के साथ मैनपाट उल्टा पानी देखने गया,,पानी नीचे से ऊपर बहता है। भुट्टे की टूटी दुकान में आरती से मिला जो अपने परिवार की जीविका चलाने या आत्मनिर्भर बनने के भुट्टा अपनी मौसी के साथ बेच रही थी। बातों बातों में पता चला कि आरती की स्नातक डिग्री मुंबई से हुई है, ट्यूशन का अनुभव और स्थानीय पर्यटन/जनजातीय क्षेत्र का फायदा उठाते हुए ये कदम उठाए जा सकते हैं जैसे शिक्षा और ट्यूशन का फायदा उठाएं स्थानीय स्तर पर कोचिंग/ट्यूशन सेंटर शुरू करें। Mainpat और आसपास के गांवों में स्कूली बच्चों (खासकर जनजातीय) को अंग्रेजी, गणित या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी सिखाएं। मुंबई का अनुभव यहां बड़ा फायदा देगा।

साथ ही सरकारी स्कूलों, आश्रम स्कूलों या जनजातीय कल्याण योजनाओं में शिक्षक/शिक्षिका के रूप में आवेदन करें। स्नातक डिग्री होने से कई पदों के लिए पात्रता बनती है।पर्यटन से जुड़ी स्वरोजगार शुरू करें (सबसे मजबूत विकल्प) Mainpat को छत्तीसगढ़ का “शिमला” कहा जाता है और उल्टा पानी एक प्रमुख आकर्षण है। पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। मैने उस से कहा भुट्टा बेचने को विस्तार दें,अन्य स्थानीय स्नैक्स, चाय-नाश्ता, या पैकेज्ड ऑर्गेनिक उत्पाद (मक्का के अलावा) जोड़ें जा सकते हैं।

होमस्टे या छोटे कैंपिंग/टेंट व्यवस्था शुरू करें (सरकार “Mystic Mainpat” जैसी पहल कर रही है)। पर्यटक गाइड, फोटो स्पॉट व्यवस्था या स्थानीय हस्तशिल्प/कालीन बेचने का काम करें। Mainpat में कालीन निर्माण का प्रशिक्षण महिलाओं को दिया जाता है और पर्यटकों को सीधे बेचा जा सकता है।

महिलाएं स्वयं सहायता समूह (SHG) के जरिए पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां चला रही हैं और अच्छी कमाई कर रही हैं। सरकारी योजनाओं और समूहों से जुड़ें (सबसे जरूरी)

बिहान योजना / लखपति दीदी (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन): स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण, प्रशिक्षण और मार्केटिंग सपोर्ट लें। सरगुजा की कई महिलाएं ऑर्गेनिक उत्पाद (सरसों तेल, मसाले, दाल, चावल), फूड प्रोसेसिंग और वनोपज से लाखों कमा रही हैं।

वन धन विकास केंद्र: महुआ, लघु वनोपज से मूल्यवर्धित उत्पाद (लड्डू, कुकीज आदि) बनाकर बेचें।

जन शिक्षण संस्थान या स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम: कालीन बुनाई, बेकरी, मसाला पैकेजिंग, डेयरी आदि का मुफ्त/सस्ता प्रशिक्षण लें। आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजनाएं (NSTFDC आदि) कम ब्याज पर लोन और सब्सिडी उपलब्ध है।

महिला सखी योजनाएं (कृषि सखी, पशु सखी, उद्योग सखी आदि) से जुड़कर अतिरिक्त आय और सम्मान दोनों मिल सकता है। छोटे व्यवसाय और मूल्यवर्धन

मक्का को सिर्फ भुट्टा के रूप में न बेचकर मक्का आटा, भुने हुए मक्का के पैकेट, या अन्य स्नैक्स बनाकर बेच सकती है। ऐसी सलाह मैने आरती को दी,

स्थानीय ऑर्गेनिक उत्पाद (हल्दी, मसाले, सरसों तेल) बनाकर पर्यटकों और ऑनलाइन/मंडी में बेचें। अगर जगह हो तो छोटे स्तर पर बकरी/मुर्गी पालन या सब्जी की खेती शुरू करें। व्यावहारिक कदम भी सजेस्ट किए,,जैसे नजदीकी जिला पंचायत / ब्लॉक कार्यालय / बिहान मिशन कार्यालय जाकर स्वयं सहायता समूह में शामिल हों या नया समूह बनाएं।

जनजातीय कल्याण विभाग और रोजगार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करवाएं।

स्किल ट्रेनिंग के लिए आवेदन करें।

छोटे स्तर पर ही शुरू करें—भुट्टा बेचते हुए ही पर्यटकों से बातचीत करके उनकी जरूरत समझें और धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ाएं।

सोशल मीडिया (WhatsApp/Instagram) पर अपने उत्पाद और ट्यूशन की जानकारी शेयर करें।

आरती के पास शिक्षा, अनुभव और स्थानीय ज्ञान तीनों हैं। अकेले भुट्टा बेचने से परिवार चल सकता है, लेकिन समूह , योजना पर्यटन/शिक्षा का मिश्रण अपनाकर वह न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन सकती है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे सकती है।

सबसे पहले स्थानीय प्रशासन या बिहान समूह से संपर्क करना सबसे अच्छा शुरुआती कदम होगा। मेहनत और सही दिशा दोनों मिल जाएं तो सफलता तय है।

ATD News
Author: ATD News

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