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August 12, 2026 5:27 pm

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पुल की मांग वर्षों पुरानी, सचिव ने बैठक में बताई समस्या फिर भी CEO प्रीति बोलीं—“जानकारी नहीं”

अंबिकापुर. सरगुजा जिले के लुण्ड्रा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरंधा के कदमपारा में नदी पर पुल नहीं होने के कारण करीब 300 की आबादी वाले ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले और चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे भी किए गए, लेकिन कदमपारा के ग्रामीण आज भी एक अदद पुल के लिए तरस रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान विधायक प्रबोध मिंज के समक्ष भी कई बार पुल निर्माण की मांग रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है. ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान उनके क्षेत्र में विकास के वादे किए जाते हैं और ग्रामीण भी अपना बहुमत वोट नेताओं के पक्ष में देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी मूलभूत मांगें फिर अधूरी रह जाती हैं.
एक ओर प्राथमिक शाला, दूसरी ओर पूर्व माध्यमिक विद्यालय
कदमपारा की समस्या इसलिए और गंभीर है क्योंकि नदी/नाले के एक ओर प्राथमिक शाला है, जबकि दूसरी ओर पूर्व माध्यमिक शाला संचालित है. बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ने के कारण स्कूली छात्र-छात्राओं को तेज बहाव वाले पानी के बीच से गुजरकर स्कूल पहुंचना पड़ता है.
ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों को सुरक्षित रास्ते से स्कूल पहुंचना चाहिए, वे बारिश के मौसम में अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं. ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है.
राशन लेने निकला युवक तेज बहाव में फंसा
इसी बीच आज राशन लेने जा रहा एक युवक नदी के तेज बहाव में फंस गया और डूबने की स्थिति में पहुंच गया. मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह युवक को सुरक्षित बाहर निकाला. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर कदमपारा में पुल निर्माण की जरूरत और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में उन्हें इसी तरह जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है.

CEO प्रीति भगत ने कहा—“पुल की कोई जानकारी नहीं”
मामले को लेकर जब जनपद पंचायत लुण्ड्रा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रीति भगत से मीडिया कर्मियों ने बीते दिनों जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पुल के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
CEO के इस जवाब ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों के मुताबिक पुल निर्माण की मांग कोई नई मांग नहीं है, बल्कि इसे लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष आवेदन और मांग रखी जा चुकी है.
बैठक में सचिव ने खुद बताया था पुल की मांग का मामला
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि CEO को पुल निर्माण की मांग की जानकारी नहीं है तो हाल ही में जनपद पंचायत कार्यालय में आयोजित सचिवों की बैठक में ग्राम पंचायत के सचिव द्वारा इस समस्या की जानकारी दिए जाने का क्या हुआ..?
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार बैठक के दौरान संबंधित ग्राम के सचिव ने स्वयं अधिकारियों के समक्ष बताया था कि ग्रामीणों द्वारा कई बार पुल निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन उनकी मांग आज भी अधूरी है.
इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कदमपारा की स्थिति और ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आते रहे हैं. ऐसे में CEO द्वारा पुल संबंधी जानकारी नहीं होने की बात कहे जाने पर प्रशासनिक स्तर पर जानकारी के आदान-प्रदान और जमीनी समस्याओं की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
करीब 300 आबादी, फिर भी मूलभूत सुविधा से वंचित
ग्रामीणों के अनुसार कदमपारा में करीब 300 लोगों की आबादी है. ग्रामीण लंबे समय से पुल की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि हर चुनाव से पहले नेता यहां पहुंचते हैं, विकास के वादे करते हैं और ग्रामीण भी उम्मीद के साथ अपना समर्थन देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद पुल जैसी बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं हो पाती.
अब ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर कब तक वे नदी के तेज बहाव में अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करते रहेंगे..?
बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी..?
कदमपारा में सामने आया ताजा मामला किसी बड़े हादसे की चेतावनी से कम नहीं है. एक ओर स्कूली बच्चे मजबूरी में नदी पार कर रहे हैं तो दूसरी ओर ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं.

अब सवाल सिर्फ पुल निर्माण का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है—जब ग्रामीण वर्षों से मांग कर रहे हैं और संबंधित सचिव अधिकारियों के समक्ष इसकी जानकारी दे चुका है, तो फिर जिम्मेदार अधिकारी को पुल की जानकारी क्यों नहीं है..? और यदि जानकारी है, तो अब तक पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया..?

ATD News
Author: ATD News

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