बिलासपुर–बहुचर्चित 17 करोड़ रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा (आरबीसी 6-4) घोटाले में गिरफ्तार तहसील कार्यालय बिलासपुर के तीन लिपिकों के समर्थन में अब छत्तीसगढ़ राज्य लिपिक संघ खुलकर सामने आ गया है। संघ ने पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर गिरफ्तार कर्मचारियों को निर्दोष बताते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण समाप्त करने और वास्तविक दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तहसील कार्यालय के अन्य लिपिकों पर भी एफआईआर की कार्रवाई जारी रही तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
संघ के अनुसार तहसील कार्यालय में पदस्थ नरेन्द्र कुमार कौशिक, हरिशंकर राठौर और गरीब राम बिंझवार को सरकंडा पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। आरोप है कि तीनों कर्मचारियों को बिना वैधानिक नोटिस के दो से तीन दिन तक थाने में बैठाकर पूछताछ की गई और बाद में रविवार शाम जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
लिपिकों की नहीं होती जांच या भुगतान की भूमिका
ज्ञापन में लिपिक संघ ने दावा किया है कि आरबीसी 6-4 के तहत मिलने वाले सर्पदंश या जहरीले जीव-जंतु के काटने से मृत्यु के मुआवजा प्रकरणों में लिपिकों की कोई निर्णयात्मक भूमिका नहीं होती।
संघ ने पूरी प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सबसे पहले पुलिस एफआईआर दर्ज करती है और पंचनामा व पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराती है।
आवेदक दस्तावेजों के साथ आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्रस्तुत करता है।
तहसीलदार, पटवारी और राजस्व अधिकारियों की जांच व प्रतिवेदन के आधार पर प्रकरण आगे बढ़ता है।अंततः कलेक्टर एवं सक्षम अधिकारी दस्तावेजों का परीक्षण कर मुआवजा स्वीकृत करते हैं।भुगतान भी सक्षम अधिकारियों के आदेश के आधार पर होता है।
संघ का कहना है कि लिपिक केवल न्यायालयीन प्रकरण दर्ज करने, फाइल प्रस्तुत करने और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन करने का कार्य करते हैं। आदेश, परीक्षण और स्वीकृति का अधिकार पूरी तरह पीठासीन अधिकारियों एवं वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों के पास होता है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी का भी किया उल्लेख…..
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि तहसील कार्यालय में आरबीसी 6-4 से जुड़े प्रकरणों के दस्तावेज तैयार करने का कार्य एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी द्वारा किया जाता था, जिसे बाद में पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था। अधिकारियों के हस्ताक्षर और आदेश के बाद ही संबंधित लिपिक प्रकरण दर्ज करने जैसी औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते थे।
अन्य लिपिकों पर कार्रवाई रोकने की मांग
लिपिक संघ ने आरोप लगाया है कि पुलिस संदेह के आधार पर कार्रवाई कर रही है और तहसील कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। संघ ने इसे अनुचित बताते हुए ऐसी कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के अंत में छत्तीसगढ़ राज्य लिपिक संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्दोष कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण वापस नहीं लिए गए और अन्य लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ ने इसके लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
फिलहाल, 17 करोड़ रुपये के कथित आरबीसी 6-4 मुआवजा घोटाले की जांच जारी है और पुलिस लगातार विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। वहीं, लिपिक संघ के इस ज्ञापन के बाद मामले ने नया प्रशासनिक और कर्मचारी संगठन से जुड़ा आयाम भी ले लिया है।




