देवभोग, पत्रकार देशबन्धु नेताम
गरियाबंद. सरकार बड़े-बड़े नारे लगाती है — “पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” और “सब पढ़ें, सब बढ़ें”। लेकिन छत्तीसगढ़ के देवभोग क्षेत्र के जामगुरियापारा स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की जमीनी हकीकत इन नारों की पोल खोल रही है। यहां स्कूल की छत से लगातार सीमेंट-प्लास्टर और ईंटों का मलबा गिर रहा है, फिर भी मासूम बच्चे मौत के साये में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, स्कूल की इमारत दशकों पुरानी है। दीवारें दरक चुकी हैं, छत जर्जर हो गई है। खासकर बारिश के मौसम में स्थिति अत्यंत खतरनाक हो जाती है। छत से पानी टपकता है, दीवारों में सीलन फैल गई है। बच्चे क्लासरूम में बैठते ही सिर पर गिरते मलबे और छत के हिस्से के डर से पढ़ते हैं।
अभिभावक दुखी स्वर में बताते हैं,
“हर रोज बच्चों को डर-डर कर स्कूल भेजते हैं। पढ़ाई छुड़वा दें तो उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, और भेजते हैं तो उनकी जान का खतरा मोल लेना पड़ता है। हम क्या करें..?”
शिकायतों पर विभाग की अनदेखी
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल की इस बदहाल स्थिति की सूचना कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी जा चुकी है। नए भवन निर्माण या मरम्मत के लिए कई आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।




