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July 8, 2026 12:22 am

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उदयपुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा पर ग्रामीणों का तीखा विरोध, बिना सहमति के गाँव को शामिल करने की साजिश..?

सरगुजा. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा रामगढ़ महोत्सव में उदयपुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा के बाद स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है. सरकार की इस एकतरफा फैसले ने ग्रामीणों की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए उन्हें अनिच्छा से शहरी क्षेत्र में धकेलने की कोशिश शुरू कर दी है.

घोषणा के तुरंत बाद उदयपुर क्षेत्र का सर्वेक्षण कार्य शुरू हो गया है. सूत्रों के अनुसार, ग्राम उदयपुर के साथ-साथ ग्राम सोनतराई के डूमरडीह को भी नगर पंचायत में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. लेकिन डूमरडीह के ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है.

ग्रामीणों ने तहसीलदार उदयपुर को ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया. उन्होंने साफ कहा कि बिना उनकी सहमति के उन्हें नगर पंचायत में शामिल न किया जाए. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज को दबाकर, उनकी इच्छा के विरुद्ध फैसले थोप रही है.

ग्रामीणों की प्रमुख चिंताएं…कृषि भूमि और आजीविका पर खतरा…नगर पंचायत बनने के बाद कृषि भूमि पर शहरी नियम लागू हो सकते हैं, जिससे किसानों की खेती-बाड़ी प्रभावित होगी.

टैक्स का बोझ… ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं. नगर पंचायत बनने पर प्रॉपर्टी टैक्स, पानी-बिजली के नए रेट्स उनका जीवन और मुश्किल बना देंगे.

सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव…गाँव की अपनी पहचान और व्यवस्था को शहरी प्रशासन के चंगुल में फंसाने की कोशिश की जा रही है.

बिना सहमति के थोपना…ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने न तो उनके प्रतिनिधियों से चर्चा की, न ही पंचायत स्तर पर कोई बैठक बुलाई. यह पूरी तरह से ऊपर से थोपा गया फैसला है.

स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब ग्रामीणों की इच्छा नहीं है तो सरकार इस जल्दबाजी में क्यों पड़ गई है..? क्या विकास के नाम पर ग्रामीणों की इच्छा को कुचलना ही विकास है..?

सरकार पर सवाल…मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार पर आरोप लग रहा है कि वह लोकतंत्र की मूल भावना को ताक पर रखकर विकास के नाम पर ग्रामीणों पर अनावश्यक बोझ डाल रही है. रामगढ़ महोत्सव जैसे मंच का इस्तेमाल घोषणा के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन उसके बाद प्रभावित लोगों की राय लेना भी जरूरी था, जो पूरी तरह से अनदेखा किया गया.

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे और बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे.

ATD News
Author: ATD News

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