अंबिकापुर। वर्षों से सरगुजा में प्रशासन, सरगुजा सेवा समिति और नागरिक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला विजयदशमी महोत्सव अब आपसी मतभेदों के कारण विवादों में घिरता नजर आ रहा है। पिछले वर्ष से आयोजन में नागरिक सेवा समिति की भूमिका सीमित किए जाने के आरोपों के बीच समिति ने इस बार आयोजन में बराबर की भागीदारी की मांग उठाई है।
इसी सिलसिले में नागरिक सेवा समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने सरगुजा सेवा समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर विजयदशमी महोत्सव 2026 में सरगुजा सेवा समिति और नागरिक सेवा समिति की 50-50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। पत्र में बैठक व्यवस्था, उद्घाटन, आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया में दोनों समितियों की आधी-आधी भागीदारी रखने की बात कही गई है।
पिछले वर्ष से उपेक्षा का आरोप
नागरिक सेवा समिति का कहना है कि पिछले वर्षों के महोत्सव में समिति के सदस्यों को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से सदस्यों में असंतोष है। समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि विगत वर्ष के महोत्सव में नागरिक सेवा समिति के सदस्यों को महत्व नहीं मिलने से समिति के सदस्यों में असंतोष व्याप्त है।
समिति ने मांग की है कि विजयदशमी महोत्सव 2026 की तैयारियों और आयोजन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में दोनों समितियों की समान भागीदारी हो, ताकि आयोजन अपनी पुरानी परंपरा और उद्देश्य के अनुरूप हो सके।
9 सितंबर तक मांगा जवाब
नागरिक सेवा समिति ने सरगुजा सेवा समिति से अपनी मांग पर तीन दिनों के भीतर यानी 9 सितंबर 2026 तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि नागरिक सेवा समिति की भावनाओं को स्वीकार नहीं किया गया तो समिति को अलग से आयोजन करने की व्यवस्था करनी पड़ेगी। साथ ही पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नागरिक सेवा समिति पृथक आयोजन के पक्ष में नहीं है।
पूर्व विधायक स्व. रविशंकर त्रिपाठी की पहल से शुरू हुई थी परंपरा
बताया जाता है कि भटगांव के पूर्व विधायक स्वर्गीय रविशंकर त्रिपाठी ने सरगुजा सेवा समिति के गठन की पहल की थी। उनका उद्देश्य प्रशासन और नागरिकों को साथ लेकर विजयदशमी जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन को सामूहिक रूप से आयोजित करना था। इसी सोच के तहत प्रशासन, सरगुजा सेवा समिति और नागरिक समिति की संयुक्त भागीदारी से विजयदशमी महोत्सव की परंपरा मजबूत हुई।
लेकिन समय के साथ आयोजन की जिम्मेदारियों और भागीदारी को लेकर पैदा हुआ मतभेद अब सार्वजनिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। नागरिक समिति की ओर से 50-50 फीसदी भागीदारी की मांग सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि वर्षों पुरानी साझी परंपरा कहीं आपसी खींचतान के कारण टूट की ओर तो नहीं बढ़ रही है।
अलग आयोजन नहीं चाहती नागरिक समिति
खास बात यह है कि नागरिक सेवा समिति ने अपने पत्र में अलग आयोजन की इच्छा से इनकार किया है। समिति का कहना है कि वह विजयदशमी महोत्सव को अलग-अलग आयोजित करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि पुरानी व्यवस्था के अनुरूप साझेदारी और आपसी समन्वय के साथ आयोजन चाहती है।
अब नजर सरगुजा सेवा समिति और जिला प्रशासन के रुख पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो वर्षों पुरानी संयुक्त आयोजन की परंपरा कायम रह सकती है, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ तो इस बार विजयदशमी महोत्सव दो अलग-अलग आयोजनों में बंटने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।



