देशबन्धु नेताम देवभोग गरियाबंद
देवभोग खोकसरा: समीप ऐतिहासिक एवं पवित्र ग्राम खोकसरा में आयोजित श्री श्री अषटपहरी नाम यज्ञ के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया। और संकीर्तन के साथ जैसे ही श्रद्धालुओं ने ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ का जयघोष किया, पूरा वातावरण अलौकिक ऊर्जा से भर उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक परिधानों में सजी सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने सिर पर कलश धारण कर गांव की परिक्रमा की। पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने फूल बरसाकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद मुख्य पंडाल में वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजा-अर्चना और अखंड नाम-कीर्तन का प्रारंभ हुआ।
स्थानीय कथावाचक हेमंत ठाकुर एवं सहयोगी पुजक केशरी दास वैष्णव ने भक्ति की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलयुग में ईश्वर की प्राप्ति और मानसिक शांति का सबसे सरल माध्यम प्रभु नाम का स्मरण है। ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ का महामंत्र न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि पूरे गांव और समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का संचार करता है।
दिनभर चले इस धार्मिक अनुष्ठान में खोकसरा सहित आसपास के कई गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालुओं ने हरे कृष्ण हरे राम का रस पान कर झांझ और मंजीरों की धुन पर जमकर नृत्य किया और प्रभु भक्ति में लीन रहे। इस कार्यक्रम को आयोजित किये
कर्ता श्री तुकाराम साहु एवं उनके धर्म पत्नी श्रीमती संजुक्ता साहु एवं बोल बम समिति व गांव के समस्त नागरिक द्वारा आयोजन से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे एवं महाप्रसाद की व्यवस्था की गई थी, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
संध्या आरती के समय पूरा पंडाल दीपों की रोशनी और जयकारों से गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से गांव की भावी पीढ़ी में सनातन संस्कृति और धार्मिक संस्कारों का सिंचन होता है। देर रात तक चले इस भक्तिोत्सव ने खोकसरा ग्राम को पूरी तरह से कृष्णमय बना दिया।



