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September 1, 2026 10:44 am

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देवभोग में अवैध रेत खनन का काला खेल: सेंदमुडा तेल नदी से उड़ीसा के कालाहांडी में डबल दामों पर तस्करी

देशबन्धु नेताम देवभोग/गरियाबंद

क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली तेल नदी इन दिनों रेत माफियाओं के लिए अकूत कमाई का जरिया बन चुकी है। देवभोग ब्लॉक के ग्राम सेंदमुडा स्थित तेल नदी तट से बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन कर पड़ोसी राज्य उड़ीसा के कालाहांडी जिले में दुगुने दामों पर बेचा जा रहा है। शासन-प्रशासन की कथित अनदेखी और सुस्त रवैये के चलते यह अवैध कारोबार दिन-रात बेधड़क फल-फूल रहा है, जिससे जहाँ एक ओर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, वहीं दूसरी ओर शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है।
रात के अंधेरे में पोकलेन और ट्रैक्टरों से खनन
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सेंदमुडा रेत घाट पर हर शाम ढलते ही अवैध खनन का खेल शुरू हो जाता है। रेत माफिया भारी-भरकम पोकलेन और जेसीबी मशीनों का उपयोग कर नदी का सीना चीर रहे हैं। दर्जनों ट्रैक्टर और हाईवा गाड़ियां बिना किसी वैध रॉयल्टी पर्ची के नदी के भीतर से रेत लोड कर रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात भर चलने वाले इस अवैध काम के कारण गाड़ियों की आवाजाही से आसपास के गांव वालों की नींद उड़ गई है और सड़कें भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।
अंतर्राज्यीय सीमा का फायदा, उड़ीसा में डबल रेट पर बिक्री
देवभोग क्षेत्र उड़ीसा सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर रेत तस्कर सेंदमुडा से रेत निकालकर सीधे उड़ीसा के कालाहांडी जैसे इलाकों में सप्लाई कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के देवभोग में जिस रेत की ट्रॉली की कीमत लगभग 2,000 से 2,500 रुपये होती है, उसी रेत को सीमा पार उड़ीसा में 5,000 से 6,000 रुपये प्रति ट्रॉली डबल दाम में बेचा जा रहा है। मुनाफा ज्यादा होने के कारण स्थानीय और उड़ीसा के रेत माफिया आपस में गिरोह बनाकर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं।
नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर मंडराया संकट
बिना किसी पर्यावरणीय स्वीकृति के हो रहे अंधाधुंध खनन से तेल नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। नदी के बीचों-बीच बड़े-बड़े गड्ढे होने से जल प्रवाह की दिशा बदल रही है और किनारे धंसने लगे हैं। गर्मी के मौसम में ग्रामीणों के लिए जल संकट की स्थिति निर्मित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, अवैध परिवहन से क्षेत्र में दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस अवैध कारोबार की पूरी जानकारी है, लेकिन जब भी शिकायत की जाती है, तो महज एक-दो ट्रैक्टरों पर जब्ती बनाकर खानापूर्ति कर दी जाती है। मुख्य तस्करों और माफियाओं पर अब तक कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

ATD News
Author: ATD News

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