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August 24, 2026 3:43 am

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संगठित गिरोह के द्वारा शिक्षा विभाग की छवि धूमिल करने की कि जा रही कोशिश !

रिपोर्टर,,,, कृष्ण नाथ टोप्पो,,,,, बलरामपुर 

बलरामपुर – जिला शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध शैक्षणिक मदों की खरीदी में करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों को लेकर इन दिनों चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से विभिन्न सामग्रियों की खरीदी, आपूर्ति, वितरण, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में की गई विभिन्न खरीदारियां ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से नियमानुसार किए जाने का दावा किया गया है।

जानकारी के मुताबिक साइकिलों की खरीदी संचालक लोक शिक्षण संचालनालय स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से हुई है। खरीदी गई साइकिलें संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गईं, फिर गठित समिति के द्वारा उसकी गुणवक्ता का परिक्षण किया गया, जिसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा उन्हें संबंधित स्कूलों में पहुंचाया गया। विद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से साइकिलों का वितरण कराया गया।

इसी तरह फर्नीचर की आपूर्ति भी संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं में कराई गई। सामग्री पहुंचने के बाद संस्थाओं से उसकी पावती प्राप्त की गई। साथ ही उपलब्ध फर्नीचर का गुणवत्ता परीक्षण भी कराया गया। गुणवत्ता एवं आपूर्ति संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित फर्मों को ट्रेजरी के माध्यम से नियमानुसार भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है।

साइंस किट की खरीदी भी राज्य स्तर से डायरेक्टरेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत की गई। संबंधित फर्म द्वारा संस्थानों में साइंस किट की आपूर्ति की गई, जिसकी प्राप्ति संबंधी पावती उपलब्ध होने की बात कही गई है। इसके बाद टीम के माध्यम से सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण एवं फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित सामग्री का भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से किए जाने की जानकारी सामने आई है।

वहीं स्वच्छता सामग्री की खरीदी भी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। सप्लायर द्वारा संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्टॉक में सामग्री की एंट्री कर उसे संबंधित स्कूलों में वितरित कराया गया। वितरण एवं स्टॉक संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार संबंधित फर्म को भुगतान किया गया।

बताया गया है कि साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री सहित विभिन्न मदों में की गई खरीदी में ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई तथा सामग्री की आपूर्ति, पावती, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई। ऐसे में खरीदी को लेकर सामने आ रहे आरोपों की वास्तविकता जांच पुरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट का भी दावा

इधर, विभागीय जानकारों का दावा है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले की शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, नियमित मॉनिटरिंग और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक निगरानी बढ़ने के बाद शिक्षकों के समय पर विद्यालय पहुंचने की व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिला है।

विभागीय जानकारों के मुताबिक, पूर्व में छोटे-छोटे कार्यों के लिए लोगों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब कई मामलों में लोग सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं और उनका समाधान भी हो रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त होने की बात सामने आ रही है। जानकारों का कहना है कि बिचौलियों की भूमिका सीमित होने से कुछ लोगों में नाराजगी भी है और इसी के चलते जिला शिक्षा अधिकारी की छवि खराब करने का प्रयास किए जाने की चर्चा है।

फिलहाल जांच अभी लंबित है और आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है, ऐसे में अंतिम निष्कर्ष सामने आने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी को दोषी ठहराना न केवल जल्दबाजी होगी, बल्कि एक जिम्मेदार अधिकारी की छवि को अनावश्यक रूप से प्रभावित करने वाला कदम भी माना जा सकता है।

नियमानुसार सभी सामग्री की खरीदी एवं वितरण की प्रक्रिया की गई हैं किंतु शिक्षा विभाग की छवि धूमिल करने का प्रयास संगठित होकर किया जा रहा हैं जबकि शिकायत की जांच होने एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं।

ATD News
Author: ATD News

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