युवा पत्रकार देशबन्धु नेताम
देवभोग (गरियाबंद):
नाग पंचमी के पावन अवसर पर सीमावर्ती क्षेत्र देवभोग के प्रसिद्ध खोकसरा स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। अलसुबह से ही मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय नागदेव” के जयकारों से गुंजायमान रहा। इस दौरान न केवल स्थानीय निवासियों ने बल्कि पड़ोसी राज्य ओड़िशा सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ और नाग देवता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
नाग पंचमी के इस विशेष पर्व पर सुबह तड़के से ही खोकसरा शिव मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। मंदिर के मुख्य पुजारी श्री केशरी दास वैष्णव जी द्वारा भगवान शिव और नाग देव का विशेष जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात् आरती कर प्रसाद वितरण की शुरुआत हुई। धूप, दीप, बेलपत्र, धतूरा, दूध और फल लेकर कतारबद्ध खड़े शिवभक्त अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। दोपहर होते-होते श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे मंदिर परिसर से लेकर मुख्य मार्ग तक लंबी लाइनें लग गईं।
भौगोलिक दृष्टि से देवभोग क्षेत्र के खोकसरा ओड़िशा की सीमा से सटा हुआ है, जिसके कारण खोकसरा धाम में हर वर्ष धार्मिक अवसरों पर ओड़िशा के नवरंगपुर, कालाहांडी और आसपास के सीमावर्ती गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन खोकसरा शिव मंदिर में जलाभिषेक करने और नाग देवता की विधिवत पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि एवं शांति का वास होता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर सेवा समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे। पीने के पानी, धूप से बचाव के लिए शेड, कतार प्रबंधन और महाप्रसाद भंडारा की सुचारू व्यवस्था की गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव के बोल बम समिति का दल भी मुस्तैद रहा। मंदिर परिसर के आसपास लगे मेले में बच्चों और महिलाओं ने जमकर खरीदारी की, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
महाआरती के साथ ही नाग पंचमी का यह धार्मिक उत्सव भक्तिभाव, श्रद्धा और हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।



