पत्रकार देशबन्धु नेताम
देवभोग गरियाबंद/आयुष विभाग के अंतर्गत संचालित खौकसरा आयुर्वेद औषधालय में पदस्थ फार्मासिस्ट जयंत कुमार दीवान पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि वे पिछले लंबे समय से अपनी किडनी की बीमारी का बहाना बनाकर सरकारी सेवा के नाम पर मिलने वाले वेतन का पूरा लाभ उठा रहे हैं, जबकि असलियत में वे औषधालय से नदारद रहते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयंत कुमार दीवान महीने में केवल एक या दो दिन ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराने औषधालय आते हैं। बाकी पूरे महीने वे बिना किसी आधिकारिक छुट्टी या वैध चिकित्सीय अवकाश के नदारद रहते हैं। इस कथित ‘आराम’ के बावजूद हर महीने उनके खाते में सरकारी खजाने से पूरा वेतन जमा हो रहा है, जो सीधे तौर पर जनता की कमाई और सरकारी कोष पर डाका डालने जैसा है।
बीमारी की आड़ में मनमानी
सूत्रों का कहना है कि जयंत कुमार दीवान अपनी किडनी की बीमारी को एक सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जब भी उनसे नियमित ड्यूटी पर आने या उनके अनुपस्थित रहने पर सवाल उठाया जाता है, तो वे अपनी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करते हैं।
नियमों के मुताबिक, यदि कोई शासकीय कर्मचारी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है, तो उसे नियमानुसार मेडिकल लीव या सक्षम प्राधिकारी से विशेष अवकाश की स्वीकृति लेनी होती है। लेकिन फार्मासिस्ट दीवान न तो औषधालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और न ही नियमों के तहत छुट्टी का आवेदन जमा कर रहे हैं। यह सीधी तौर पर पदीय दायित्वों की अवहेलना और वित्तीय अनियमितता का मामला है।
ग्रामीणों और मरीजों की परेशानी
खौकसरा आयुर्वेद औषधालय मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का केंद्र है। फार्मासिस्ट के लंबे समय से अनुपस्थित रहने के कारण औषधालय की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
दवाइयों का वितरण प्रभावित: नियमित फार्मासिस्ट न होने से मरीजों को समय पर आयुर्वेद दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं।
आपातकालीन स्थिति में लाचारी: ग्रामीण जब दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
अतिरिक्त कार्यभार: औषधालय के अन्य कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बन रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि बीमारी की आड़ में इस तरह की कामचोरी बर्दाश्त के बाहर है। अगर कोई कर्मचारी काम करने में अक्षम है, तो उसे नियमानुसार सेवानिवृत्ति लेनी चाहिए या विभाग को उनकी जगह किसी अन्य फार्मासिस्ट की व्यवस्था करनी चाहिए।
कड़े कदम उठाने की मांग
सरकारी नौकरी की आड़ में कर्तव्यविमुखता और सरकारी धन के दुरुपयोग का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आयुष विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि:
निष्पक्ष जांच: जयंत कुमार दीवान के उपस्थिति रजिस्टर और उनके मेडिकल दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच की जाए।
वेतन की वसूली: बिना ड्यूटी किए उठाए गए वेतन की रिकवरी की जाए।
अनुशासनात्मक कार्रवाई: दोषी पाए जाने पर सेवा नियमों के तहत सख्त निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आयुष विभाग के आला अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं या फिर यूं ही सरकारी खजाने पर डाका डालने की छूट बनी रहेगी।



