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July 22, 2026 3:13 am

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शिक्षा विभाग और शासन के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना अब सामान्य ट्रेंड बन चुका है..? एक विद्यालय में दो प्राचार्य : नियम-कानून है या नहीं..?

सरगुजा. क्या एक सरकारी स्कूल में एक साथ दो प्राचार्य हो सकते हैं..? क्या शिक्षा विभाग और शासन के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना अब सामान्य ट्रेंड बन चुका है..? ये सवाल लखनपुर में स्थित पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय को लेकर उठ रहे हैं, जहाँ वर्तमान में दो प्राचार्य कार्यरत बताए जा रहे हैं. यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े कर रहा है.

पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और अंग्रेजी व हिंदी दोनों माध्यमों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी. लेकिन वर्तमान स्थिति इस लक्ष्य पर ही सवालिया निशान लगा रही है.
शासकीय आदेशों की अनदेखी…
कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ शासन और स्कूली शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी कर सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों एवं शिक्षकों के संलग्नीकरण (deputation) को तुरंत समाप्त किया जाए. इन कर्मचारियों को 15 दिनों के अंदर अपनी मूल पदस्थापना पर वापस भेजा जाए और वहाँ उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए.
जिला शिक्षा अधिकारी, अंबिकापुर ने भी इस संबंध में पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि संलग्नीकरण समाप्त करने के बाद ही शिक्षकों की VSK एवं ABES ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने के उपरांत जुलाई माह का वेतन आहरण किया जाएगा.
इसके बावजूद लखनपुर के आत्मानंद विद्यालय में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं.
दो प्राचार्यों का विवाद…
विद्यालय में वर्तमान प्राचार्य आर.के. विश्वकर्मा कार्यभार संभाल रहे हैं. वहीं, भौतिकी विषय के व्याख्याता ऋषि पांडे भी प्राचार्य के रूप में ही सक्रिय बताए जा रहे हैं.
ऋषि पांडे की मूल पदस्थापना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सलका में है. उन्हें पहले वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आत्मानंद विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था. नियम के अनुसार, जब नियमित प्राचार्य की पदस्थापना हो जाती है तो अतिरिक्त प्रभारी का कार्यभार स्वतः समाप्त हो जाना चाहिए और संबंधित शिक्षक को मूल स्थान पर वापस भेज दिया जाना चाहिए.
लेकिन ऋषि पांडे अभी भी आत्मानंद विद्यालय में बने हुए हैं और संलग्नीकरण समाप्त करने के शासकीय आदेश के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है.
सवालों के घेरे में कई पहलू…
नियमित प्राचार्य की नियुक्ति के बाद भी ऋषि पांडे को क्यों नहीं वापस भेजा गया..?
जिला शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद उनका संलग्नीकरण क्यों जारी है..?
क्या यह शासकीय आदेशों की खुली अवहेलना है..?
सूत्रों का कहना है कि वर्तमान प्राचार्य आर.के. विश्वकर्मा इस माह सेवा निवृत्त होने वाले हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद प्राचार्य पद खाली हो जाएगा.
ऐसे में ऋषि पांडे को कुछ दिनों के लिए जानबूझकर रोके रखा गया है ताकि “सेटिंग” के जरिए उन्हें दोबारा स्थायी प्राचार्य बनाया जा सके.
स्थानीय लोग और शिक्षक वर्ग इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक संरक्षण और मनमानी का उदाहरण मान रहे हैं.
शिक्षा व्यवस्था पर असर…
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है. यह पूरे जिले और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और शासकीय आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाता है. अगर उत्कृष्ट विद्यालय जैसे संस्थानों में ही नियमों की अनदेखी की जा रही है तो सामान्य स्कूलों की स्थिति क्या होगी..?
शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले की तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच करानी चाहिए. दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे उदाहरण न बनें.

ATD News
Author: ATD News

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