अंबिकापुर. सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के अंतर्गत आने वाली विभिन्न ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के निर्माण कार्यों के भुगतान को लेकर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. स्थानीय लोगों ने जनपद पंचायत के सरपंचों और सचिवों पर फर्जी बिल-वाउचर बनाकर भुगतान करने का आरोप लगाया है.
एक ही फर्म को आधे से अधिक पंचायतों का भुगतान.. लखनपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत करीब 74 ग्राम पंचायतें आती हैं, जहां केंद्र सरकार की 15वीं वित्त आयोग की राशि विकास कार्यों के लिए आती है. “मेरी पंचायत” एप्लीकेशन में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आधे से अधिक पंचायतों में राहुल बिल्डिंग मटेरियल नामक एक ही दुकान/फर्म को निर्माण कार्यों का भुगतान किया गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में इस नाम की कोई दुकान या फर्म मौजूद ही नहीं है. इसके बावजूद एक ही फर्म के खाते में लगातार भारी मात्रा में भुगतान हो रहा है, जिससे पंचायती राज व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
एक ऑपरेटर के जरिए डीएससी आईडी और ओटीपी साझा…
सूत्रों के अनुसार, गुमगराकला गांव के हरकेश साहू नामक एक ऑपरेटर को माध्यम बनाकर आधे से अधिक सरपंच और सचिव अपने पंचायत के डीएससी आईडी और ओटीपी साझा कर भुगतान करवा रहे हैं. इसके बदले में हरकेश साहू को कमीशन दिए जाने की बात भी सामने आई है.
बिना GST के लाखों का भुगतान…
जांच में यह भी सामने आया है कि निर्धारित सीमा के बाद अनिवार्य GST जमा किए बिना ही लाखों रुपये के भुगतान किए जा रहे हैं। एक ही व्यक्ति/फर्म के नाम पर बार-बार भुगतान होना यह संकेत देता है कि या तो यह फर्म किसी सरपंच/सचिव से जुड़ी हुई है, या फिर फर्जी बिल-वाउचर बनाकर राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है.
सरपंच-सचिवों का बचाव, सवालों के घेरे में भूमिका
जब कुछ पंचायतों के सरपंचों और सचिवों से इस फर्म के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब देने से बचने की कोशिश की. इससे मामला और संदिग्ध हो गया है.
जनपद सीईओ का बयान…इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत लखनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रकाश सिंह ने कहा “आपके माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है. पंचायतें निर्माण कार्यों के भुगतान के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन अगर एक ही फर्म को कई पंचायतों से भुगतान हो रहा है तो यह गलत है. हम तुरंत टीम गठित कर इसकी सूक्ष्म जांच कराएंगे. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी.”
बरहाल अब देखने वाली बात होगी कि जांच में सच का पर्दा उठता है या जांच के नाम पर खानापूर्ति कर ठंडे बस्ते में यह मामला चली जाती है यह आने वाले समय में जरूर देखा जाएगा.




