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October 24, 2026 1:53 am

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स्वच्छ भारत मिशन की खुली पोल: लखनपुर में सेग्रीगेशन शेड बने शोपीस, बदहाली के कगार पर सरकारी संसाधन

लखनपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के उद्देश्य से शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत लखनपुर विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में सवालों के घेरे में नजर आ रही है। पंचायतों में कचरा प्रबंधन के लिए बनाए गए सेग्रीगेशन शेड (कचरा पृथक्करण केंद्र) कहीं अनुपयोगी पड़े हैं तो कहीं उचित देखरेख और रखरखाव के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। स्वच्छता अभियान के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों की बदहाली ने योजना के क्रियान्वयन और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थिति यह है कि जिन संसाधनों का इस्तेमाल गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए किया जाना था, वे ही अब बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पंचायतों में स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। यदि समय रहते इनकी सुध नहीं ली गई तो सरकारी धन से तैयार किए गए भवन और उपलब्ध कराए गए संसाधन पूरी तरह अनुपयोगी हो सकते हैं।

केवरी पंचायत में जर्जर शेड, शौचालय की छत भी गायब

लखनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत केवरी में सेग्रीगेशन शेड की स्थिति बदहाल बताई जा रही है। यहां कचरा प्रबंधन के लिए बनाया गया शेड टूट-फूट की स्थिति में पहुंच चुका है। वहीं, इसके पास निर्मित शौचालय की छत तक नहीं बची है। परिसर की हालत देखकर उसकी उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में स्वच्छता अभियान के तहत कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराए गए रिक्शे भी लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण खराब होने की कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत में नियमित रूप से कचरा उठाव ही नहीं हुआ, तो फिर सेग्रीगेशन शेड और कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?

ग्रामीणों की इन शिकायतों ने पंचायत स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था के संचालन और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पंचायत का पक्ष सामने आना बाकी है।

आधे से अधिक पंचायतों में ऐसी स्थिति होने का दावा

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के अनुसार, बदहाल सेग्रीगेशन शेड और अनुपयोगी संसाधनों की समस्या केवल केवरी पंचायत तक सीमित नहीं है। विकासखंड की कई अन्य पंचायतों में भी इसी तरह की स्थिति होने की बात कही जा रही है। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो यह स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा की जरूरत को दर्शाता है।

एक ओर पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर भवनों की बदहाली, संसाधनों का उपयोग नहीं होने और नियमित कचरा उठाव की व्यवस्था पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की जांच आवश्यक हो जाती है।

निगरानी के अभाव में दम तोड़ती व्यवस्था?

स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य केवल शेड और शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि गांवों में नियमित कचरा संग्रहण, कचरे का पृथक्करण और उचित निपटान सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए पंचायत स्तर पर संसाधनों का नियमित उपयोग, कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करना और समय-समय पर निरीक्षण करना जरूरी है।

लेकिन यदि निर्मित भवनों का रखरखाव नहीं हो रहा, कचरा संग्रहण के लिए उपलब्ध कराए गए रिक्शे अनुपयोगी पड़े हैं और कचरा उठाव नियमित नहीं है, तो योजना के मूल उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

ऐसे में जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों को विकासखंड की सभी पंचायतों में सेग्रीगेशन शेड, शौचालयों और स्वच्छता संसाधनों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराना चाहिए। साथ ही, जहां कमियां सामने आएं, वहां सुधारात्मक कार्रवाई कर संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

अब जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होने का इंतजार

लखनपुर विकासखंड में स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि सरकारी योजनाओं के तहत निर्मित भवनों और उपलब्ध कराए गए संसाधनों की नियमित निगरानी आखिर कौन कर रहा है? यदि पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है, तो फिर सेग्रीगेशन शेड की बदहाली और संसाधनों के अनुपयोगी होने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

अब देखना होगा कि जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए जरूरी है कि योजनाएं केवल सरकारी फाइलों और निर्माण कार्यों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ गांवों में भी दिखाई दे।

ATD News
Author: ATD News

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