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October 18, 2026 4:59 am

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छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से 8 हजार ज्यादा कैदी, 15 हजार की जगह बंद हैं करीब 23 हजार बंदी

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की 33 जेलों में बंदियों को रखने की निर्धारित क्षमता 15 हजार 25 है, जबकि यहां करीब 23 हजार बंदी निरुद्ध हैं। यानी जेलों में क्षमता से लगभग 8 हजार अधिक कैदी रह रहे हैं। यह जानकारी राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र में सामने आई है।
जेलों में बढ़ती भीड़ को कम करने के उद्देश्य से बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, अब तक यह परियोजना शुरू नहीं हो सकी है। मामले में हाईकोर्ट ने सरकार के शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
निर्धारित क्षमता से 53 प्रतिशत अधिक बंदी
राज्य सरकार के शपथपत्र के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश की 33 जेलों में कुल 22 हजार 980 बंदी थे, जबकि इन जेलों की कुल क्षमता 15 हजार 25 बंदियों की है। इस तरह जेलों में निर्धारित क्षमता से लगभग 53 प्रतिशत अधिक कैदी रखे गए हैं। कैदियों की बढ़ती संख्या के कारण जेलों में उपलब्ध स्थान, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बेमेतरा की ओपन जेल परियोजना अटकी
जेलों में बंदियों की भीड़ कम करने और सुधारात्मक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन स्थापित करने की योजना तैयार की गई थी। इस परियोजना के लिए 48 पदों के सृजन की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। शुरुआती चरण में 15 कर्मचारियों की तैनाती को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद तकनीकी और मैदानी समस्याओं के चलते परियोजना अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
ओपन जेल जैसी व्यवस्था का उद्देश्य पात्र बंदियों को नियंत्रित परिस्थितियों में अधिक स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करना है। ऐसे में इस परियोजना में हो रही देरी से जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने की योजना भी प्रभावित हो रही है।
बंदियों के पुनर्वास पर भी जोर
सरकार की ओर से बंदियों के पुनर्वास के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने और पात्र व्यक्तियों को बैंक ऋण से जोड़ने जैसी पहल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।
हाईकोर्ट में अब 2 दिसंबर को सुनवाई
इस मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ में हुई। खंडपीठ ने राज्य सरकार के शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी।
प्रदेश की जेलों में क्षमता से कहीं अधिक बंदियों की मौजूदगी के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार जेलों में भीड़ कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और बेमेतरा की प्रस्तावित ओपन जेल कब तक शुरू हो पाती है।

ATD News
Author: ATD News

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