Explore

Search

July 24, 2026 2:54 am

लेटेस्ट न्यूज़

चेक डैम बना गांव का जल बैंक, किसानों के लिए खुली समृद्धि की राह…जहां बहता था पानी, वहीं अब बह रही है खुशहाली

बिलासपुर – कभी हर बारिश के बाद ठरकपुर गांव का पानी नालों से बहकर दूर निकल जाता था। खेतों में नमी नहीं टिकती थी, कुएं और नलकूप सूख जाते थे, किसान एक फसल तक सीमित रहते थे लेकिन आज वही ठरकपुर गांव जल संरक्षण की ताकत से आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई मिसाल बन चुका है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम ने न केवल वर्षा जल को सहेजने का काम किया, बल्कि किसानों के जीवन में ऐसा सकारात्मक बदलाव लाया, जिसने खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की।  

जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पंचायत ठरकपुर में वर्ष 2025-26 के दौरान 19.01 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम आज ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कृषि समृद्धि का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। इस चेक डैम के निर्माण से गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, वहीं अब उसका संरक्षण होने से खेतों, कुओं और नलकूपों में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने लगा है। इससे किसानों को सिंचाई, पशुपालन और आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। ठरकपुर गांव लंबे समय से जल संकट और मिट्टी कटाव जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। वर्षा का पानी तेजी से बह जाने के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा था और रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने मनरेगा के तहत नाले पर सीसी चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे स्थानीय ग्रामीणों और मनरेगा श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

चेक डैम बनने के बाद वर्षा जल का संचयन होने लगा और पानी धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। इससे आसपास के कुओं और नलकूपों का जलस्तर बढ़ा तथा गांव में सिंचाई की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब किसान वर्ष में दो से तीन फसलें लेने लगे हैं। टमाटर, मिर्च जैसी नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मिट्टी का कटाव कम होने से खेतों की उर्वरता भी बनी हुई है। जल उपलब्धता बढ़ने से पशुपालन को भी नई दिशा मिली है। वर्षभर नाले में पानी रहने से पशुओं के लिए पेयजल और चारे की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है, जिससे दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेती और पशुपालन दोनों पहले की तुलना में अधिक लाभकारी हो गए हैं। गांव के एक किसान बताते हैं, पहले हमारी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। चेक डैम बनने के बाद सिंचाई की सुविधा मिलने से अब हम टमाटर और मिर्च जैसी नकदी फसलें उगा रहे हैं। हमारी वार्षिक आय लगभग दोगुनी हो गई है और अब खेती लाभ का सौदा बन गई है। यह जल संरक्षण की संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है।

ATD News
Author: ATD News

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर