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July 2, 2026 12:57 am

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मैनपाट में बॉक्साइट खदान का उग्र विरोध..तिब्बती समाज और ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा, MLA का समर्थन

अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और तिब्बती समाज का विरोध बुधवार को चरम पर पहुंच गया. कमलेश्वरपुर-केसरा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. लोगों ने परियोजना को अपने अस्तित्व और पर्यावरण के लिए घातक बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की।

तिब्बती समाज के सदस्यों ने कहा कि भारत सरकार द्वारा पुनर्वास के रूप में उन्हें यहां बसाया गया था. ऐसे में उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण करना पूरी तरह अनुचित है. प्रस्तावित 145.8 हेक्टेयर खदान क्षेत्र में से 50.3 हेक्टेयर भूमि तिब्बतियों की है, जहां उनका मंदिर भी स्थित है. समाज का आरोप है कि खदान शुरू होने पर उनका पूरा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.

जनसुनवाई में फर्जीवाड़े के आरोप…जनसुनवाई के दौरान पर्यावरण विभाग की सर्वे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे. केसरा गांव के सरपंच ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट संबंधी पावती पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं और उन्हें कोई रिपोर्ट नहीं दी गई. रोपाखार और कमलेश्वरपुर के सरपंचों ने भी यही शिकायत की.

वही अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विभाग न तो रिपोर्ट देने के वैध दस्तावेज पेश कर पाया और न ही जनसुनवाई नियम 2016 का पालन किया. उन्होंने इस मनमानी के विरोध में धरना दिया.

सरकारी रिपोर्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा…

सबसे गंभीर आरोप यह लगा कि प्रस्तावित खदान के महज 16 मीटर की दूरी पर असगवां-मालतीपुर रिजर्व फॉरेस्ट है, जबकि सरकारी रिपोर्ट में 15 किलोमीटर तक जंगल न होने का दावा किया गया है. इस स्पष्ट विरोधाभास ने विभाग की रिपोर्ट की साख पर सवालिया निशान लगा दिया.

विधायक का ग्रामीणों के साथ खुला समर्थन

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने मामले में सीधा हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “यदि ग्रामीण खदान के खिलाफ हैं, तो मैं उनके साथ खड़ा हूं और इसका पुरजोर विरोध करूंगा.” उन्होंने पिछली सरकार पर खदानों को बिना सोचे-समझे बढ़ावा देने का आरोप लगाया और साफ कहा कि ग्रामीणों की सहमति के बिना मैनपाट में किसी भी खदान को अनुमति नहीं दी जाएगी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनपाट का पर्यावरण और जैव-विविधता पहले से ही संवेदनशील है। वे खदान खुलने से होने वाले वन विनाश, जल संकट और कृषि प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं.

ATD News
Author: ATD News

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