देशबन्धु नेताम देवभोग गरियाबंद
छत्तीसगढ़ में हर साल की तरह इस बार भी धान खरीदी का सीजन शुरू होने से पहले ही पड़ोसी राज्य उड़ीसा से धान की तस्करी और आवाजाही शुरू हो गई है। खासकर उड़ीसा के कालाहांडी क्षेत्र से खोकसरा अंतराज्यीय मार्ग में पिकअप वाहनों के जरिए धान को छत्तीसगढ़ की मंडियों और सीमावर्ती इलाकों में खपाने की साज़िश तेज हो गई है। सरकारी मंडियों के आधिकारिक तौर पर खुलने से पहले ही धान के प्रवेश ने राज्य के कृषि बाजार, प्रशासन और स्थानीय किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
क्यों हो रही है छत्तीसगढ़ में धान की तस्करी?
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान का बेहतर समर्थन मूल्य और अन्य प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है, जिसके चलते पड़ोसी राज्यों के बिचौलिए और व्यापारी उड़ीसा के कम दामों वाले धान को छत्तीसगढ़ की सीमा में लाकर बेचने की फिराक में रहते हैं। उड़ीसा के कालाहांडी और आसपास के जिलों में धान की बंपर पैदावार होती है, और बिचौलियों द्वारा स्थानीय किसानों से कम कीमतों पर धान खरीदकर उसे छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों की मंडियों में ऊंचे दामों पर बेचने का काला कारोबार लंबे समय से चल रहा है।
मंडी के आधिकारिक दरवाजे खुलने से पहले इस अवैध आवक का मुख्य उद्देश्य सरकारी टोकन व्यवस्था और पंजीयन प्रणाली से बचने का होता है। बिचौलिए चाहते हैं कि मुख्य खरीदी शुरू होने से पहले ही बड़ी मात्रा में धान को छत्तीसगढ़ के गोदामों या स्थानीय व्यापारियों के पास डंप कर दिया जाए, ताकि बाद में इसे आसानी से खपाया जा सके।
स्थानीय किसानों में आक्रोश और चिंता
उड़ीसा से आ रहे इस धान के कारण छत्तीसगढ़ के स्थानीय किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि पड़ोसी राज्य का धान छत्तीसगढ़ के कोटे और सोसायटियों में खप जाने से यहाँ के वास्तविक किसानों को अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलने में बाधा उत्पन्न होती है। सोसायटियों में धान बेचने के लिए मिलने वाले टोकन और सीमा तय होने के कारण, यदि बाहर का धान यहाँ बिक जाएगा, तो स्थानीय किसानों को अपना धान बेचने के लिए लंबी कतारों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि इस धान आवक को रोकने के लिए सरहद पर तुरंत कड़े कदम उठाए जाएं।
प्रशासन और चेक-पोस्ट्स पर चौकसी बढ़ी
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रशासन और खाद्य विभाग हरकत में आ गए हैं। सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उड़ीसा और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित चेक-पोस्ट्स पर पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं, जो रात के समय आवाजाही करने वाले वाहनों की कड़ी जाँच कर रही हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि धान परिवहन को रोकने के लिए ‘धान खरीदी निगरानी समिति’ को भी सक्रिय कर दिया गया है। बिना वैध दस्तावेजों के यदि कोई भी वाहन धान ले जाते हुए पाया जाता है, तो उसे तुरंत ज़ब्त कर खनिज और मोटर व्हीकल एक्ट के साथ-साथ कृषि उपज मंडी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में सीमावर्ती इलाकों से धान से भरे कुछ वाहनों को पकड़े जाने की भी सूचना मिली है, जिससे तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है।
उड़ीसा के कालाहांडी क्षेत्र से छत्तीसगढ़ की मंडियों में धान की समय-पूर्व आवक एक गंभीर समस्या है, जो न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देती है बल्कि छत्तीसगढ़ के ईमानदार किसानों के हितों पर भी सीधा प्रहार करती है। इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केवल सीमा पर चेकिंग ही काफी नहीं है, बल्कि उन स्थानीय व्यापारियों और गोदाम मालिकों पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है जो इस प्रकार के अवैध धान को संरक्षण देते हैं।



