देशबंधु नेताम देवभोग गरियाबंद
देवभोग / खोकसरा:
शासन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुँचाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन देवभोग क्षेत्र के आयुर्वेदिक औषधालय खोकसरा का आलम कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ तैनात फार्मासिस्ट महोदय बीते 5 सालों से महीने में सिर्फ एक बार अपनी ‘हाजिरी’ लगाने आते हैं और पूरे महीने का सरकारी वेतन बड़े आराम से उठा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की इस घोर अनदेखी और रहस्यमयी साठगांठ का खामियाजा अब गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है फार्मासिस्ट के दर्शन पाना भी ईद के चाँद जैसा हो गया है। फार्मासिस्ट महीने में केवल एक दिन ही औषधालय का रुख करते हैं, रजिस्टर पर दस्तखत करते हैं, अपना वेतन बनवाते हैं और चंपत हो जाते हैं।
हालत यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में दूर-दराज के गांवों से इलाज और दवा की उम्मीद में आने वाले बुजुर्ग, निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हैं।
विभागीय अधिकारी मौन: मिलीभगत या मजबूरी?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि पिछले 5 वर्षों से जारी इस ‘आरामदायक सेवा’ पर उच्चाधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी?
क्या विभागीय अधिकारियों को इस बात की खबर नहीं है?
या फिर अधिकारियों के कानों तक पहुँचने वाली ग्रामीणों की चीख-पुकार को दबा देता है?
इतने लंबे समय तक बिना ड्यूटी किए सरकारी खजाने से नियमित रूप से वेतन जारी होना, बिना किसी प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं लगता। अधिकारियों की यह मौन सहमति सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और कर्तव्यहीनता को बढ़ावा दे रही है।
कौन है जिम्मेदार?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?
वेतन लेने वाले फार्मासिस्ट, जो अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह भूल चुके हैं?
विभागीय जांचकर्ता व उच्चाधिकारी, जो शिकायतों के बाद भी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं?
ग्रामीण क्षेत्र में जहाँ लोग मौसमी बीमारियों से जूझ रहे हैं, वहाँ एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र का इस तरह ‘माहवारी औषधालय’ बन जाना स्वास्थ्य विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5 सालों के हाजिरी रजिस्टर और वेतन भुगतान की गहन समीक्षा हो।
लापरवाह फार्मासिस्ट और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
यदि जल्द ही खोकसरा आयुर्वेदिक औषधालय में नियमित फार्मासिस्ट की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। अब देखना यह है कि सो रहा प्रशासन इस समाचार के बाद जागता है या लापरवाही का यह दौर ऐसे ही जारी रहेगा।

