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June 30, 2026 11:30 pm

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सरगुजा में जारी है खुली लूट! मुख्यमंत्री क्षेत्र के मरीज को भी नहीं बख्शा

अंबिकापुर. एक तरफ आयुष्मान भारत योजना गरीबों को मुफ्त इलाज का सपना दिखाती है, वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में इस योजना का गलत फायदा उठाकर मरीजों से खुलेआम वसूली की जा रही है. अंबिकापुर के दयानिधि अस्पताल में एक बार फिर बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. अस्पताल के संचालक के निर्देश पर स्टाफ ने मरीज के परिजनों से लिए गए पैसे अपने निजी बैंक खाते में जमा कराए, जबकि बिल तक जारी नहीं किया गया.

दरअसल जशपुर जिले के सन्ना गांव (मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के क्षेत्र) का एक मरीज एजेंट के माध्यम से फोन पर संपर्क कर दयानिधि अस्पताल भेजा गया. अस्पताल में भर्ती कर इलाज के नाम पर भारी वसूली शुरू कर दी गई. जब सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश गोस्वामी अस्पताल पहुंचे और वीडियो बनाकर मरीज के परिजनों से पूछताछ की, तो सच्चाई सामने आ गई.

परिजनों ने बताया कि पैसे अस्पताल के बजाय एक नर्स के बैंक खाते में जमा किए गए. कोई आधिकारिक बिल या रसीद नहीं दी गई. मुकेश गोस्वामी ने इस पूरे मामले का वीडियो अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. पीएस मार्को को फोन पर शिकायत दर्ज कराई.

सीएमएचओ का बयान..(पी एस मार्को)

सीएमएचओ ने फोन पर स्वीकार किया कि पहले भी महावीर अस्पताल सहित अन्य निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के नाम पर लूट हुई थी, जहां जांच टीम ने कार्रवाई कर पैसे वापस दिलाए थे. उन्होंने आश्वासन दिया कि दयानिधि अस्पताल मामले की भी जांच होगी.

क्या पहले की कार्रवाई सिर्फ दिखावा थी..?

सूत्रों के अनुसार, महावीर अस्पताल मामले में पैसे वापस दिलाने का दावा किया गया, लेकिन व्यवस्था पर कोई ठोस लगाम नहीं लगी. अब उसी तरह दयानिधि अस्पताल में फिर वही खेल दोहराया जा रहा है.

डॉ. संदीप त्रिपाठी (दयानिधि अस्पताल के संचालक) के एजेंटों का पूरे संभाग में नेटवर्क बताया जाता है. सरकारी अस्पतालों के मरीजों को भी फुसलाकर यहां भेजा जाता है. इलाज के नाम पर खून की कमाई चूसने तक मरीजों को नहीं छोड़ा जाता.

पुराने आरोप और सत्ता की चुप्पी

यह पहला मामला नहीं है. पहले भी दयानिधि अस्पताल की लूट के मामले बड़े न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों में छप चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दोनों सरगुजा संभाग से आते हैं, लेकिन अंबिकापुर में निजी अस्पतालों की इस लूट की बाजार पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. गरीब और भोले-भाले मरीज आयुष्मान कार्ड के नाम पर लाखों रुपये गंवा रहे हैं.

जनता के सवाल…

क्या आयुष्मान योजना अब निजी अस्पतालों के लिए कमाई का जरिया बन गई है..?

स्वास्थ्य विभाग कब तक सिर्फ शिकायतों पर आश्वासन देता रहेगा..?

मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र से आए मरीज की लूट पर क्या कार्रवाई होगी..?

बरहाल अब देखना होगा कि क्या सच में अंबिकापुर शहर में संचालित लुटेरा अस्पतालों पर ताला लगेगी या फिर से खुला छूट दे दिया जाएगा मरीजों के परिजनों से पैसे लूटने की,चाहे वह स्वास्थ्य मंत्री के गृह ग्राम से आए मरीज हो,या मुख्यमंत्री के क्षेत्र के मरीज हो. वैसे तो रायपुर में (कुनकुरी सदन) में जशपुर जिले से आए मरीजों का अच्छा खासा ख्याल रखा जाता है,लेकिन उनके संभाग में ही निजी अस्पताल संचालक लुट मचा रखा है,शायद इस ओर ध्यान आकर्षण कर बड़ी कार्रवाई तो बनता ही है.

ATD News
Author: ATD News

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