अंबिकापुर/ सरगुजा जिले के लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं और बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली निशुल्क दवाओं के रखरखाव और वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल परिसर में बड़ी मात्रा में आयरन सिरप, विटामिन-ए तथा अन्य दवाएं खुले स्थान पर रखी मिलीं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें से कई दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आयरन सिरप अभी भी वैध है और वर्ष 2027 तक उपयोग योग्य है.
जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर स्थित मर्चुरी (शवगृह) के बरामदे के समीप खुले स्थान पर दवाओं की सैकड़ों बोतलें और कई पेटियां रखी हुई थीं. इनमें वर्ष 2022 में निर्मित आयरन सिरप तथा विटामिन-ए की दवाएं शामिल थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विटामिन-ए की दवा करीब छह माह पहले ही एक्सपायर हो चुकी है. वहीं खुले में रखी दवाओं के कारण मरीजों के साथ आने वाले बच्चे भी सिरप की बोतलों से खेलते नजर आए, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रही.
मामला तब और गंभीर हो गया जब मीडिया की टीम अस्पताल पहुंची. आरोप है कि निरीक्षण के दौरान दवा वितरण प्रभारी अमित सिसोदिया ने खुले में रखी दवाओं को तत्काल स्टोर रूम में रखवा दिया. पत्रकारों का यह भी आरोप है कि वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान फार्मासिस्ट ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया.
इस संबंध में दवा वितरण प्रभारी अमित सिसोदिया ने बताया कि संबंधित आयरन सिरप एक्सपायर नहीं हुआ है और उसकी वैधता वर्ष 2027 तक है. उनके अनुसार सिरप वितरण के उद्देश्य से बाहर रखा गया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विटामिन-ए की कुछ दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं. उनका कहना है कि सहायक खंड चिकित्सा अधिकारी बी. नागवंशी को वितरण के लिए दवाएं दी गई थीं तथा छत से पानी टपकने के कारण कुछ पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर मिट गए होंगे.
इधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. ओ. पी. प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है. इसी कारण वितरण के लिए सिरप की पेटियां बरामदे के पास रखी गई थीं. वर्ष 2022 में निर्मित सिरप की एक्सपायरी अवधि के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दवा की वैधता कंपनी के मानकों के अनुसार होती है और रिकॉर्ड देखकर ही इसकी पुष्टि की जा सकती है.
उल्लेखनीय है कि जिस स्थान पर दवाएं खुले में रखी गई थीं, वह सीएमओ डॉ. पी. एस. मार्को के सरकारी निवास से लगभग 50 फीट की दूरी पर स्थित है. इसके बावजूद दवाओं का इस तरह खुले में रखा जाना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और दवा भंडारण की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है.
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि दवाएं उपयोग योग्य थीं तो उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित तरीके से क्यों नहीं रखा गया, और यदि कुछ दवाएं वास्तव में एक्सपायर हो चुकी थीं तो उन्हें समय रहते नष्ट करने अथवा अलग रखने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा दवा भंडारण और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है.




