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June 24, 2026 1:20 am

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मैनपाट बॉक्साइट खदान जनसुनवाई : स्थानीयों का भारी विरोध,,क्या इसके बावजूद भी जिला प्रशासन करेगी जनसुनवाई..?

अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान को लेकर आज जनसुनवाई शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले स्थानीय ग्रामवासियों और प्रभावित पंचायतों ने भारी विरोध जताया है. ग्रामीणों ने खदान परियोजना के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे सरकार की जनविरोधी नीति करार दिया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जनसुनवाई को तत्काल स्थगित करने की मांग की है.

नियमों की धज्जियां उड़ाईं, जनसुनवाई को बताया अवैध

प्रभावित क्षेत्र के ग्राम पंचायतों ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई से संबंधित सभी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रस्तावित जनसुनवाई की जानकारी क्षेत्र में प्रचलित दो पत्राचार के माध्यम से कम से कम 30 दिन पहले अनिवार्य रूप से प्रकाशित की जानी चाहिए थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई.

इसके अलावा, जनसुनवाई से 30 दिन पहले प्रभावित 46 पंचायतों को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के कार्य वितरित करना कानूनी रूप से अनिवार्य था, परंतु इस प्रावधान का भी पालन नहीं किया गया. सबसे गंभीर आरोप यह है कि प्रभावित गांवों में ग्रामसभा की सहमति तक नहीं ली गई, जिसके कारण पूरी जनसुनवाई को अवैध और शून्य बताया जा रहा है.

ग्राम-नर्मदापुर, कुनिया, पथरई, लुरैना, कमलेश्वरपुर एवं सरभंजा समेत कई पंचायतों में यह जनसुनवाई आयोजित की जा रही थी.

आक्रोश और विरोध प्रदर्शन…जनसुनवाई शुरू होने से पहले मैनपाट के संबंधित ग्राम पंचायतों सहित स्थानीय वासियों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कहा गया कि बिना उचित सूचना और ग्रामसभा की सहमति के यह सुनवाई जनता के अधिकारों का हनन है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जबरन खदान परियोजना को आगे बढ़ाती है तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.

स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि बॉक्साइट खदान से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा, जंगलों की कटाई होगी, जल स्रोत प्रभावित होंगे और हजारों लोगों की आजीविका छिन जाएगी. उन्होंने इसे सरकार की “कॉर्पोरेट तुष्टिकरण” नीति बताया और कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र को बलि का बकरा बनाया जा रहा है.

एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पहले सूचना ही नहीं दी, ग्रामसभा की सहमति नहीं ली, फिर कैसे जनसुनवाई हो सकती है..? यह पूरी प्रक्रिया फर्जी और जनविरोधी है. हम अपनी जमीन और जंगल नहीं छोड़ेंगे।”

सरकार पर सवाल…विरोध करने वालों का कहना है कि राज्य सरकार पर्यावरण और जनहित की अनदेखी करते हुए केवल खनन कंपनियों को फायदा पहुंचाने में लगी हुई है. मैनपाट के घने जंगलों और आदिवासी संस्कृति को खतरे में डालकर विकास के नाम पर विनाश की साजिश रची जा रही है.

क्षेत्र में इस मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है. स्थानीय प्रशासन द्वारा जनसुनवाई को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

ATD News
Author: ATD News

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