अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में बक्साइट खदान प्रभावितों को दिए जाने वाले मुआवजे में बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है. कुल 19 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण में गड़बड़ी के आरोपों के बीच कलेक्टर ने तत्काल जांच कमेटी गठित कर दी है. मैनपाट के तहसीलदार और संबंधित पटवारी को जिला कार्यालय अटैच कर दिया गया है, ताकि जांच प्रभावित न हो. जांच रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
यह घोटाला बक्साइट खनन परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के मुआवजे से जुड़ा है. सूत्रों के अनुसार, उरंगा गांव के 220 और बरिमा गांव के 24 लोगों को मुआवजा वितरित किया जाना है, लेकिन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं. आरोप है कि जिन व्यक्तियों की कोई जमीन ही नहीं है, उनके नाम पर भी फर्जी मुआवजा प्रकरण तैयार कर दिए गए. कम से कम 23 ऐसे लोगों को मुआवजा देने की तैयारी थी, जिनके पास कोई प्रभावित भूमि नहीं थी.
सबसे चौंकाने वाला खुलासा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे से जुड़ा है. उनके फार्म हाउस को खेत बताकर मुआवजा देने का प्रयास किया गया था. यह मामला तब सुर्खियों में आया जब राजस्व विभाग की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ. प्रभावितों की सूची में गैर-जमीनधारकों को शामिल करने से साजिश की बू आ रही है, जिससे लाखों-करोड़ों की राशि का गबन होने का खतरा था.
कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई है, जो मुआवजा वितरण की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेजों की सत्यता और शामिल अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करेगी. तहसीलदार और पटवारी को जिला मुख्यालय अटैक करने का फैसला जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए लिया गया है.
स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावितों में इस घोटाले को लेकर आक्रोश है. मैनपाट क्षेत्र में पहले से ही बक्साइट खनन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां किसान मुआवजे की मांग को लेकर कंपनी की मशीनें रोक चुके हैं. यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की सख्ती का संकेत देता है, लेकिन साथ ही राजस्व व्यवस्था में गहरी सड़ांध की ओर भी इशारा करता है.
जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है. सूत्रों का कहना है कि यह मामला और गहरा सकता है, क्योंकि मुआवजा राशि सरकारी खजाने से जुड़ी है और फर्जीवाड़े में कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है.



