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February 11, 2026 5:43 am

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राजपुर समिति प्रबंधक के द्वारा धान खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा,, समिति में बिना धान लाये किसान का धान हुआ खरीदी

कृष्ण नाथ टोप्पो,,,, बलरामपुर 

बलरामपुर जिले के राजपुर- प्रदेश में धान खरीदी की अवधि को बढ़ाने के लिए लगातार किसानों के द्वारा सरकार के ऊपर दबाव बनाया जा रहा था जिस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने दो दिनो की अवधि बढ़ाई थी जिसके बाद समीतियों में बचे हुए किसान धान बिक्री के लिए पहुंचे हुए थे ईसी दौरान बलरामपुर जिले के राजपुर धान खरीदी केन्द्र में ग्यारह किसानों का टोकन काटा गया था जिसके बाद मात्र पांच किसान ही धान बिक्री के लिए पहुंचे हुए थे, लेकिन राजपुर धान खरीदी केन्द्र का प्रबंधक रामनाथ पैकरा ने इन किसानों से धान खरीदी करने से मना कर दिया था जिसकी सूचना किसानों ने अम्बिकावाणी के स्थानीय संवाददाता से की जिसके बाद स्थानीय संवाददाता ने मौके पर जा कर मामले को समझा तो पता चला कि जो राजपुर धान समीती का प्रबंधक सुबह से ही शराब के नशे में धूत था और सभी को धान वापस ले जाने को बोल दिया था। जब हमने किसानों का धान नही खरीदी करने का बात पुछा तो उसने बताया कि राजपुर तहसीलदार श्रीमती कावेरी मुखर्जी ने मना किया है इसलिए मै धान नही खरीद रहा हूं। जिसके बाद तत्काल हमने राजपुर तहसीलदार से दूरभाष के माध्यम से बात किया तो उन्होंने साफ तौर पर बताया कि मैने किसी को भी ऐसा आदेश नही दिया है आज जितने भी किसानों का टोकन कटा है उन सभी के धान खरीदी किया जाएगा अगर प्रबंधक ऐसा कर रहा है तो यह गलत है। इस संवाद के बाद उपस्थित सभी किसानों का धान खरीदी का कार्य प्रारंभ किया गया।

इस लापरवाही की सूचना मिलने के बाद तत्काल राजपुर तहसीलदार श्रीमती कावेरी मुखर्जी और नायब तहसीलदार नरेंद्र कंवर राजपुर धान समिति केंद्र में पहुंचे और सभी किसानों की समस्याओं को दूर किया। इसी दौरान निरीक्षण में पता चला कि इन किसानों से पूर्व एक किसान रामधनी यादव निवासी नरसिंहपुर का धान आज खरीदा गया है जो संदेह उत्पन्न कर रही थी, जब प्रबंधक ने साफ तौर पर उपस्थित किसानों का ध्यान खरीदी करने से मना कर दिया था तो एक किसान का धान कब और कैसे समिति के द्वारा खरीदा गया। इस पर नायब तहसीलदार और राजपुर तहसीलदार ने कड़ाई से पूछताछ की तो गेटकीपर और उपस्थित किसानों ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि उक्त किसान के द्वारा यहां पर कोई भी धान नहीं लाया गया है और प्रबंधक के कहे अनुसार उसकी धान की बिक्री को सत्यापित कर दिया गया है, इस पर तत्काल उपस्थित अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एक पंचनामा तैयार कर समिति में उपस्थित गेटकीपर और किसानों से बयान भी दर्ज कराया की उक्त किसान का धन समिति के अंदर नहीं आया है जिसकी बिक्री कर फर्जी तरीके से सत्यापित भी कर दिया गया है। अधिकारियों के द्वारा इस पंचनामे के बाद समिति के ऑपरेटर को सख्त निर्देश दिए गए की इस किसान का धान की खरीदी ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज नहीं कि जाएगी जो की पूरी तरीके से फर्जी बिक्री किया जाना प्रतीत हो रहा है जिसकी जांच के बाद ही इस प्रकार के लापरवाही करने वाले सभी दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

धान समितियों में इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर किया गया कृत्य लगातार संज्ञान में आते रहता है की जो वास्तविक रूप से किसान है उनके स्थान में जो बहरूपिये किस्म के किसान या बिचौलिए होते हैं वे लगातार समिति प्रबंधक के संपर्क में रहते हुए अवैध धान को ठिकाने लगाने में लगे रहते हैं, राजपुर धन समिति केंद्र में भी इसी प्रकार का मामला खरीदी के अंतिम दिन में उजागर हुआ है जहां एक किसान समिति में एक भी धान लाए बगैर ही 70 क्विंटल धान बिक्री कर लेता है जिसका समिति प्रबंधक सत्यापन भी कर देती है। इस मामले के बाद यह पूरी तरीके से साफ हो जाता है कि राजपुर धान खरीदी केंद्र में चल रहे खरीदी के दौरान न जाने कितने बहरूपिये किसानों का धान इस प्रकार से बिक्री किया गया होगा जिसका कोई अनुमान नही है। अगर प्रशासन सख्ती से सभी समितियों के धान खरीदी का अवलोकन करेगी तो इस प्रकार के कई मामले उजागर हो सकते हैं।

इस प्रकार के मामले में कई कई पटवारीयों की भी कार्य शैली संदेश के घेरे में है क्योंकि सरकार के सख्त निर्देश के बावजूद भी इनके द्वारा सही से मौके की जांच नही की गई और घर बैठे ही ऐसे बहरूपिये किसानों के बताये अनुसार टोकन सत्यापन कर दिया गया जिससे उनकी राहें आसान होती गई और बहरूपिये किसान आसानी से धान खरीदी केन्द्रों में अवैध धान को खपाने में सफल हुए हैं। इस मामले ने पूरे बलरामपुर प्रशासन के ऊपर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है आखिर इतने कढ़ाई और कड़ी निगरानी के बावजूद भी इस प्रकार के लोग किसके संरक्षण में इस पूरे खेल को खेलने में सफल हो जाते हैं।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि जो किसान आज राजपुर धन समिति केंद्र में धान बिक्री करने के उद्देश्य से पहुंचा हुआ था उसके खेत में मुख्य रूप से बैगन की खेती की गई थी इसके बावजूद भी उसका टोकन काटा गया और धान बिक्री के लिए समिति भी पहुंचा। यह भी जांच का विषय है कि आखिर बैगन की खेती कर रहे किसान कैसे बैगन की खेती के साथ-साथ धान की खेती भी कर लेता है और उसे समिति तक भी ले आता है, कहीं ना कहीं यह पूरी तरीके से प्रशासन की लापरवाही प्रतीत होती है कि आखिर बैगन की खेती के जगह पर कैसे धान की खेती का सत्यापन कर दिया गया।

इस मामले ने प्रशासन को पूरी तरीके से उलझा कर रख दिया है कि आखिर इस प्रकार की लापरवाही में मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार है और किन-किन लोगों पर इस लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी या यह मामला ठंढ़े बस्ते में डाल दिया जाएगा।

ATD News
Author: ATD News

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