अंबिकापुर. सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत डडगांव में संचालित ग्रेवल पब्लिक स्कूल (जिसे स्थानीय रूप से ग्रीएबल पब्लिक स्कूल के नाम से भी जाना जाता है) में मूलभूत सुविधाओं की कमी और अनियमितताओं की जांच आखिरकार ठंडे बस्ते में क्यों डाल दी गई.? चार महीने पहले ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. दिनेश कुमार झा के संज्ञान में यह मामला लाया गया था, लेकिन जांच के नाम पर महज खानापूर्ति ही नजर आ रही है. स्थानीय अभिभावकों और निवासियों में आक्रोश है कि क्या BEO या DEO कार्यालय में पदस्थ जांच कर्मचारियों की सेटिंग से यह मामला दबा दिया गया है.?
स्कूल में करीब 700 से अधिक नौनिहालों को एक छोटे से रूम में भेड़-बकरियों की तरह बैठाया जा रहा है. स्कूल परिसर में खेल मैदान, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य आवश्यक सुविधाओं की घोर कमी है, जो छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस का स्पष्ट उल्लंघन है. विभागीय नियमों के अनुसार, निजी स्कूलों को मान्यता देने से पहले इन सुविधाओं की सख्त जांच अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ. स्कूल में खेलने की जगह तक नहीं है, फिर भी फीस वसूली जा रही है. अधिकारियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं”
नवंबर 2025 में DEO डॉ. दिनेश कुमार झा ने इस मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए थे. सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक स्तर पर जांच टीम गठित की गई थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. क्या यह बड़े निजी स्कूलों पर कार्रवाई और छोटे स्कूलों पर सेटिंग का खेल है.? शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस के बावजूद ऐसे स्कूलों को मान्यता कैसे मिल जाती है.? अभिभावकों का आरोप है कि जांच कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन के बीच सेटिंग से मामले दबाए जा रहे हैं.
सरगुजा जिले में पहले भी स्कूलों में अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं. सितंबर 2025 में ही एक रिपोर्ट में ग्रेवल पब्लिक स्कूल की सुविधाओं की कमी का खुलासा हुआ था, जहां खेल मैदान की अनुपस्थिति को प्रमुख मुद्दा बताया गया था. DEO डॉ. दिनेश कुमार झा, जो पदभार ग्रहण करने के बाद से शिक्षा सुधारों पर जोर दे रहे हैं, ने उस समय जांच का आश्वासन दिया था. लेकिन अब तक कोई प्रगति नजर नहीं आ रही. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल जांच कर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करनी चाहिए. तभी निजी स्कूलों में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लग सकता है और बच्चों के भविष्य की रक्षा हो सकेगी.
क्या DEO कार्यालय इस मामले पर चुप्पी तोड़ेगा या सेटिंग का सिलसिला जारी रहेगा.? आने वाले दिनों में इस पर नजर रहेगी.
मामले को पुनः याद दिलाने जिला शिक्षा अधिकारी डॉ दिनेश कुमार झा से फोन पर संपर्क हमारे द्वारा किया गया लेकिन वे फोन नहीं उठाए।



