सरगुजा. लखनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत केनापारा में आज भी शासकीय प्राथमिक शाला नहीं है. गांव के 50 से अधिक मासूम बच्चे रोज़ाना 2 किलोमीटर उबड़-खाबड़ रास्ता पैदल तय करके पोड़ी गांव स्कूल जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि यह ग्राम पंचायत, लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाला गांव है, फिर भी पिछले 6 सालों से विधायक जी ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया.
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि उन्होंने कई बार विधायक प्रबोध मिंज से मिलकर, लिखित आवेदन देकर और जनसुनवाई में भी अपने गांव में प्राथमिक शाला खुलवाने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, काम कुछ नहीं हुआ. वहीं ग्रामीणों ने कहा, “विधायक जी चुनाव के समय तो हर घर आते हैं, लेकिन अब बच्चों की पढ़ाई का सवाल आने पर नजरें चुरा लेते हैं.
याद रहे, वर्ष 2019 में केनापारा अलग ग्राम पंचायत बना था. उस समय से ही ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि 2015 में मर्ज की गई उनकी पुरानी प्राथमिक शाला को फिर से शुरू किया जाए. पुराना स्कूल भवन आज भी मौजूद है, बस उसमें आंगनबाड़ी चल रही है और भवन जर्जर हो चुका है.
संकुल समन्वयक भी मानते हैं – प्रस्ताव कई बार भेजे गए
संकुल समन्वयक उजियार विश्वकर्मा ने स्पष्ट कहा, “ग्रामीणों की मांग पर हमने कई बार विधायक जी और जिला शिक्षा अधिकारी को अलग शाला शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है.” सवाल यह उठता है कि जब स्थानीय स्तर से प्रस्ताव जा रहा है, तब भी लुण्ड्रा के विधायक प्रबोध मिंज इस मामले को मंत्री-मुख्यमंत्री स्तर तक क्यों नहीं उठा पाए..?
ग्रामीणों में अब भारी आक्रोश है. उनका कहना है, “हमने इन्हीं विधायक जी को वोट दिया था, लेकिन हमारे बच्चों की पढ़ाई के लिए एक छोटा-सा स्कूल भी नहीं खुलवा सके. अगर अगले चुनाव से पहले भी स्कूल नहीं खुला तो हम सबक सिखाएंगे.”
अब देखना यह है कि क्या विधायक प्रबोध मिंज इस खबर के बाद भी खामोश रहेंगे या अपने क्षेत्र के इन मासूम बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे..?





