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February 4, 2026 1:47 pm

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मैनपाट में बॉक्साइट खदान की जनसुनवाई से पहले ही भड़का जनाक्रोश, टेंट-पंडाल उखाड़ फेंके

अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश रविवार को उस समय खुलकर सामने आ गया, जब जिला प्रशासन द्वारा जनसुनवाई के लिए लगाए गए टेंट-पंडाल को ग्रामीणों ने उखाड़कर फेंक दिया। जनसुनवाई शुरू होने से कई घंटे पहले ही सैकड़ों की संख्या में जुटे आदिवासी समुदाय के लोग खदान के पूरी तरह खिलाफ नजर आए।

जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग के नेतृत्व में जोरदार विरोध…विरोध का नेतृत्व कर रही जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने कहा,“मैनपाट हमारी जीवन रेखा है। यहां का पर्यावरण, जल स्रोत और जैव-विविधता पहले से ही खतरें में है। अब एक और नई बॉक्साइट खदान नहीं खुलने देंगे। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों का सवाल है।”

प्रस्तावित खदान नर्मदापुर के हाथी प्रभावित क्षेत्र कडराजा और उरंगा गांव के पास खोली जानी है। मां कुदरगढ़ी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को यहां बॉक्साइट खनन का प्रस्ताव मिला हुआ है। कंपनी की ओर से आज (30 नवंबर) दोपहर में ग्राम पंचायत नर्मदापुर में जनसुनवाई आयोजित की गई थी।

जनसुनवाई स्थल पर तनाव, पुलिस बल तैनात

जनसुनवाई से पहले ही सुबह से ग्रामीण बड़ी संख्या में जुटने लगे थे। जैसे ही जिला प्रशासन की टीम टेंट लगाने पहुंची, लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और टेंट-कुर्सियां उखाड़कर सड़क पर फेंक दीं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। फिलहाल जनसुनवाई स्थगित कर दी गई है।

ग्रामीणों का आरोप – कंपनी के दलालों ने रात भर पिलाई शराब…विरोध कर रहे ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाया है कि खदान कंपनी के दलालों ने जनजाति बाहुल्य गांवों में शनिवार रात भर शराब पिलाई, ताकि आदिवासी समुदाय के लोग जनसुनवाई स्थल तक न पहुंच सकें और कंपनी बिना किसी विरोध के औपचारिकताएं पूरी कर ले। ग्रामीणों ने बताया कि कई युवा अभी भी नशे में हैं और उनसे जबरन अंगूठा लगवाने की कोशिश की जा रही थी। एक स्थानीय निवासी ने बताया,

“हमारे गांव में रात भर शराब बांटी गई। सुबह जब हम विरोध करने आए तो कुछ लोग नशे में धुत होकर सो रहे थे। ये लोग हमारी जमीन और जंगल छीनना चाहते हैं।”

मैनपाट पहले से ही खनन की मार झेल रहा

मैनपाट क्षेत्र पहले से ही कई बॉक्साइट खदानों की वजह से पर्यावरणीय क्षति झेल रहा है। यहां के जल स्रोत सूख रहे हैं, जंगल कम हो रहे हैं और हाथियों का आतंक भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नई खदान खुलने से पूरे क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

जिला प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार जनसुनवाई को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है।

आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्तावित बॉक्साइट खदान का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ATD News
Author: ATD News

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