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February 4, 2026 1:47 pm

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11 दिसंबर तक का अल्टीमेटम: फर्जी ST सर्टिफिकेट पर शकुंतला पोर्ते घिरीं, हजारों आदिवासियों ने घेरा कलेक्टर दफ्तर

अंबिकापुर/बलरामपुर. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है. हजारों की संख्या में शिकायतकर्ताओं और आदिवासी संगठनों ने आज कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर उग्र प्रदर्शन किया. विधायक की अनुपस्थिति और सुनवाई की तारीख 11 दिसंबर तक बढ़ाने के फैसले पर भड़के आक्रोश में कार्यालय का घेराव कर डाला. उनका आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा सरकार के दबाव में प्रशासन कार्रवाई में देरी कर रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है.

फर्जी प्रमाण पत्र का गंभीर आरोप…प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक शकुंतला पोर्ते पर लंबे समय से फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने का आरोप लग रहा है. यह सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित है, और विधायक ने गोंड जनजाति का प्रमाण पत्र पेश कर चुनाव लड़ा था. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विधायक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की निवासी हैं, जहां गोंड जाति अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में वर्गीकृत है. उनका विवाह वाड्रफनगर क्षेत्र के बहादुर सिंह से हुआ था, और 2002-03 में पति की जाति के आधार पर वाड्रफनगर एसडीएम द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र अवैध है.

इस मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर की थी. कोर्ट ने 17 जून 2025 को सख्त निर्देश जारी कर जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति गठित करने का आदेश दिया. समिति ने विधायक को जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल दाखिला-निकासी रजिस्टर, वंशावली सहित मूल दस्तावेज पेश करने के लिए तीन नोटिस भेजे, लेकिन विधायक ने कोई जवाब नहीं दिया. बलरामपुर और अंबिकापुर के अभिलेखागारों में भी विधायक के मूल दस्तावेजों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.

27 नवंबर की घटना : विधायक अनुपस्थित, कार्यालय पर घेराबंदी…आज निर्धारित सुनवाई के लिए विधायक को कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश था. हालांकि, शकुंतला पोर्ते व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंचीं. उनके वकील ने दस्तावेज पेश कर तारीख 11 दिसंबर तक बढ़वा ली, जिससे शिकायतकर्ता भड़क उठे. सर्व आदिवासी समाज संगठन के नेतृत्व में हजारों आदिवासी कार्यकर्ताओं ने कलेक्टरेट का घेराव किया. प्रदर्शन में राज्य अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे.

प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा, “तारीख पर तारीख देकर मामला दबाया जा रहा है. सत्ता के दबाव में प्रशासन न्याय नहीं कर रहा” प्रदर्शन देर शाम तक चला, और संगठन ने चेतावनी दी कि 11 दिसंबर को निर्णय न होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन तेज किया जाएगा.

शिकायतकर्ताओं की मांगें : तत्काल निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई…शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट मांग की है कि विधायक का जाति प्रमाण पत्र तत्काल निरस्त किया जाए, उनकी विधायकी रद्द हो और फर्जीवाड़े के लिए एफआईआर दर्ज की जाए. वहीं शिकायतकर्ता धन सिंह धुर्वे ने कहा, “यह आदिवासी समुदाय के साथ धोखा है. हमारी सीट पर गैर-आदिवासी का कब्जा बर्दाश्त नहीं” संगठनों ने 7 दिनों के भीतर कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.

राजनीतिक हलचल : हाईकोर्ट की रिपोर्ट पर नजरें…यह मामला अब हाईकोर्ट के निर्देश पर निर्भर है. समिति को विसंगति पाए जाने पर रिपोर्ट सीधे कोर्ट को भेजनी होगी. आदिवासी संगठनों का कहना है कि देरी से समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है, जबकि भाजपा इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रही है. 11 दिसंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, और तब तक प्रदर्शन थमने के संकेत नहीं हैं.

ATD News
Author: ATD News

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