अम्बिकापुर. अम्बिकापुर शहर में आज रमजानुल मुबारक के पवित्र महीने का आखिरी जुम्मा, जिसे जुम्मा अलविदा या जुम्मातुल विदा के नाम से जाना जाता है, जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजियों की मौजूदगी में अदा किया गया। यह दिन मुसलमानों के लिए बेहद खास और बरकत वाला माना जाता है, क्योंकि यह रमजान के आखिरी शुक्रवार के रूप में ईद-उल-फित्र की खुशियों की दस्तक देता है।
जामा मस्जिद में अलविदा जुम्मा की नमाज के लिए अंजुमन कमेटी ने व्यापक तैयारियां की थीं। मस्जिद को साफ-सुथरा बनाया गया, विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई और नमाजियों के लिए उचित इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय स्तर पर कई सक्रिय सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर इरफान सिद्दीकी, अफजाल अंसारी, अब्दुल लतीफ, मिन्हाजुल खान, पिक्कू खान, रिजवान सिद्दीकी, बाबू भाई, अमीर अंसारी, याकूब खान, नान बाबा, गुड्डन अंसारी, रियाज अंसारी, सिकंदर खान और इमरान सिद्दीकी सहित कई लोग संगठन और प्रबंधन में सक्रिय रहे। इन सभी के प्रयासों से कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ और नमाजियों ने सामूहिक रूप से अल्लाह से माफी, रहमत, बरकत और दुनिया में अमन-चैन की दुआएं मांगीं।
अलविदा जुम्मा रमजान के महीने की विदाई और ईद की आमद का प्रतीक है। नमाज के बाद मौजूद लोगों ने इस पवित्र महीने की इबादतों को कबूल करने की दुआ की और आने वाली ईद की खुशियां मनाने की तैयारियों पर चर्चा की।
यह आयोजन अम्बिकापुर के मुस्लिम समुदाय में एकता, भाईचारे और धार्मिक उत्साह का बेहतरीन उदाहरण रहा।
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