अंबिकापुर. सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में यूरिया खाद की कालाबाजारी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय किसानों और प्रशासन दोनों को हिला कर रख दिया है. खरसिया रोड स्थित विजय ट्रेडिंग कंपनी द्वारा अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच लगभग 4743 बोरी यूरिया की बिक्री रिकॉर्ड में दिखाई गई, लेकिन वास्तविक जांच में यह संख्या महज 678 बोरी ही साबित हुई. इससे करीब 4000 बोरी यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग का खुलासा हुआ है.
कृषि विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, दुकानदार ने 95 किसानों के नाम पर 50-50 बोरी यूरिया की बिक्री दर्ज की गई थी, लेकिन इन किसानों को वास्तव में यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया. कई मामलों में फर्जी नामों (यहां तक कि छोटे बच्चों के नाम पर भी) बिक्री दिखाई गई. यह कालाबाजारी केंद्र सरकार की नजर में आई, जहां अंबिकापुर में यूरिया की खपत असामान्य रूप से अधिक दिख रही थी.
प्रशासन की कार्रवाई
जिला कलेक्टर ने विजय ट्रेडिंग का लाइसेंस निरस्त कर दिया,दुकान को पहले ही सील कर दिया गया है,दुकान में मौजूद दो करोड़ रुपये मूल्य का खाद स्टॉक राजसात (सरकारी जब्ती) करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे सरकार के खजाने में जमा किया जाना है.
हालांकि, कृषि विभाग के उप संचालक द्वारा राजसात संबंधी फाइल अब तक कलेक्टर के पास नहीं भेजी गई है, जिससे इस प्रक्रिया में देरी हो रही है.
न्यायिक फैसला…
दुकानदार ने कार्रवाई के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी, लेकिन अदालत ने अब तक की सभी कार्यवाही को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया. मामला अब उच्च स्तर (आयुक्त स्तर) पर विचाराधीन है.
किसानों पर प्रभाव…
यह मामला उस समय सामने आया जब किसान पहले से ही यूरिया की कमी और अधिक कीमतों से जूझ रहे थे. सरकारी दर पर उपलब्ध यूरिया (लगभग 267 रुपये प्रति बोरी) को ब्लैक में 400-500 रुपये या इससे अधिक में बेचा जा रहा था, जिससे खेती की लागत बढ़ गई और उत्पादन प्रभावित हुआ.
वहीं कृषि विभाग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है. पहले भी इसी तरह की कालाबाजारी पर लाइसेंस निलंबित किए गए थे, लेकिन राजसात में देरी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या दोषियों के खिलाफ पूरी कार्रवाई होगी. प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसानों को समय पर उचित दर पर खाद मिल सके.
यह घटना छत्तीसगढ़ में खाद की कालाबाजारी के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, जहां हाल के महीनों में कई दुकानों पर छापेमारी और लाइसेंस रद्द किए गए हैं. लेकिन ऐसी गड़बड़ियों पर त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई हो सके ताकि खाद की कालाबजारी पर अंकुश लग सके.



