रिपोर्टर/कृष्ण नाथ टोप्पो
राजपुर. महान नदी के नरसिंहपुर घाट पर दर्जनों टीपर ट्रैक्टरों से दिन-रात हो रही अवैध रेत उत्खनन की गतिविधियाँ प्रशासन की नींद उड़ा रही हैं। रेत तस्कर न केवल शासन को प्रतिमाह लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं, बल्कि मुख्यालय राजपुर होकर शंकरगढ़, धौरपुर और लुण्ड्रा क्षेत्रों में यह अवैध रेत खपाई जा रही है। इससे ग्राम पंचायत नरसिंहपुर को भी भारी राजस्व हानि हो रही है।
स्थानीय विशेष पिछड़ी जनजाति के निवासी मार्ग किनारे बसे हुए हैं। वे बताते हैं कि रेत तस्करों की भारी गाड़ियाँ रात-दिन दौड़ती रहती हैं, जिससे उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है। भय के साये में जीने को मजबूर ये आदिवासी परिवार अब चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनकी आवाज़ अब बाहर आ रही है।
जप्त रेत को भी बेचने में माहिर तस्कर—सरपंच ने खोले राज़
पहले भी ग्राम नरसिंहपुर में अवैध रेत भंडारण पर तहसीलदार राजपुर ने कार्रवाई की थी। जप्त रेत को ग्राम पंचायत नरसिंहपुर के सरपंच को सुपुर्द किया गया था। लेकिन तस्करों ने इसे भी चोरी-छिपे बेच डाला!
सरपंच शंभू राम ने खुलासा किया—
“मुझे 180-200 ट्रेक्टर ट्राली जप्त रेत का सुपुर्दगी प्राप्त हुआ था। लेकिन रेत तस्करों ने इसे इस तरह बेच दिया:
रमेश पुत्र रामबली (बहेराडांड़) द्वारा 50 ट्रिप,
दीपक पुत्र रामधनी (यादवपारा) द्वारा लगभग 50 ट्रिप,
कुमार गौरव सिंह पुत्र सुनील सिंह (मेन रोड बड़कापारा) द्वारा लगभग 35 ट्रिप,
सुरेश जायसवाल पुत्र रामजनम द्वारा लगभग 20 ट्रिप।
मैंने इसकी सूचना थाना प्रभारी और तहसील कार्यालय को दी, लेकिन इन तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे उनके हौसले और बुलंद हो गए हैं।”
अपर कलेक्टर का बयान—कार्रवाई जल्द
अपर कलेक्टर बलरामपुर आर.एस. लाल ने कहा—”अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए एसडीएम और तहसीलदार को सख्त निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी। राजपुर की दो घाटों की नीलामी हेतु प्रशासन ने कदम उठाए हैं। नीलामी से संबंधित सभी कागजात मंगाए जा रहे हैं और दो माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
सुपुर्द चीज (जप्त रेत) को यदि किसी ने उठाया है, तो सरपंच द्वारा नाम बताए जाने पर उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
यह मामला न केवल राजस्व की हानि का है, बल्कि पर्यावरण, नदी की सुरक्षा और स्थानीय आदिवासियों के जीवन पर गहरा असर डाल रहा है। प्रशासन की अब असली परीक्षा है—क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या रेत माफिया पर असली ब्रेक लगेगा..? जनता की नजर टिकी हुई है।



